Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

हरि हरि! आर कि एमन दशा हब

हरि हरि! आर कि एमन दशा हब कबे बृषभानु-पूरे आहीरी गोपेर घरे तनया हैया जनमिब
अर्थ

हे हरि! हे हरि! क्या मुझे कभी ऐसी दशा प्राप्त होगी, जब मैं महाराज वृषभानु के नगर में, गोप-गोपियों के घर में, एक कन्या के रूप में जन्म लूँगी?

जावटे आमार कबे ए-पाणि-ग्रहण हबे वसति करिब कबे ताय सखीर परम श्रेष्ठ जे ताहार हय प्रेष्ठ सेवन करिब ताँर पाय
अर्थ

कब जावट में मेरा विवाह होगा, और कब मैं वहाँ निवास करूँगी? सखियों में जो सबसे श्रेष्ठ हैं और उनकी सबसे प्यारी हैं, कब मैं उनके चरणों की सेवा करूँगी?

तेँह कृपाबान् हैञा रातुल चरणे लैञा आमारे करिबे समर्पण सफल हैबे दशा पूरिबे मनेर आशा सेवि दुँहार जुगल-चरण
अर्थ

जब वे कृपा करके मुझे अरुण चरणों तक ले जाकर वहीं समर्पित कर देंगी, तब युगल के चरणों की सेवा करके मेरी यह दशा सफल होगी और मन की आशा पूरी होगी।

बृन्दाबने दुइ-जन चतुर्दिके सखी-गण सेवन करिब अवशेषे सखी-गण चारिभिते नाना जन्त्र लैञा हाते देखिब मनेर अभिलाषे
अर्थ

वृन्दावन में दिव्य युगल चारों ओर सखियों से घिरे हैं, कब मैं उनकी सेवा करूँगी? चारों ओर सखियाँ हाथों में तरह-तरह की सामग्री लिए होंगी, और मैं मन भरकर यह सब देखूँगी।

दूँहु चाँद-मुख देखि' जुडाबे तापित आङ्खि नयने बहिबे अश्रु-धार वृन्दार निदेश पाब दोँहार निकटे जाब हेन दिन हैबे आमार
अर्थ

उनके दोनों चंद्रमुखों को देखकर मेरी संतप्त आँखें शीतल होंगी, और नेत्रों से अश्रुधारा बहेगी। वृन्दा देवी से आदेश पाकर मैं उनके समीप जाऊँगी। वह दिन कब मेरा होगा?

श्री-रूप-मञ्जरी सखी मोरे अनाथिनी देखि राखिबे रातुल दुटी पाय नरोत्तम दास भणे प्रिय-नर्म-सखी-गणे कबे दासी करिबे आमार
अर्थ

मुझे असहाय और अनाथ देखकर श्री रूप-मंजरी कब मुझे अपने दोनों अरुण चरणों में रख लेंगी? नरोत्तम दास कहते हैं, प्रिय नर्म-सखियाँ कब मुझे अपनी दासी बनाएँगी?

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
प्रार्थना
पद
6