हरि हरि कबे मोर हइबे सुदिन
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2 रिकॉर्डिंगहरि हरि! मेरा वह शुभ दिन कब आएगा, जब मैं प्रेम में विवश होकर श्री राधा-कृष्ण की सेवा करूँगा?
जब मैं वाद्य बजाते हुए मधुर स्वर में गाऊँगा, और आनन्दपूर्वक युगल के रूप-गुणों का गान करूँगा, वह दिन कब आएगा?
'राधिका गोविन्द' पुकारकर मैं ऊँचे स्वर में कब रोऊँगा, कि मेरे नेत्रों के अश्रुओं से मेरा सारा शरीर भीग जाए?
हे रूप, हे सनातन, हे रघुनाथ दास, और हे मेरे प्राणस्वरूप श्री जीव गोस्वामी, इस बार मुझ पर कृपा करें।
हे ललिता, हे विशाखा, और सख्य-भाव में रहने वाले श्रीदाम, सुबल आदि सखागण, इस बार मुझ पर कृपा करें।
आप सब मिलकर मुझ पर दया करें और मेरी आशा पूर्ण करें, यह नरोत्तम दास की सदा की प्रार्थना है।
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।