Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जगन्नाथ मिश्र महा सुखे

जगन्नाथ मिश्र महा-सुखे पुत्र कोले करि चुम्ब देय चान्द-मुखे
अर्थ

जगन्नाथ मिश्र प्रसन्न होकर पुत्र को गोद में बैठाकर उसके चन्द्रमा जैसे मुख को चूमते हैं।

शिरे केश-भूषण साजाय आगुलि चलिते स्नेह उथले हियाय
अर्थ

वे बड़े यत्न से पुत्र के केशों को सजाते हैं। उनका हृदय स्नेह से उमड़ पड़ता है।

निमा-इ बापेर कोल हैते भङ्गी करि नामये अङ्गने बेडा-इते
अर्थ

फिर अपनी इच्छा का इशारा करके नन्हे निमाई पिता की गोद से सरककर नीचे उतरते हैं और आँगन में चले जाते हैं।

हामागुडि बेडाय अङ्गने सोँआर नूपुर बाजे सु-चारु चरणे
अर्थ

वे हाथों और घुटनों के बल चलते हुए आँगन में घूमते हैं। उनके सुन्दर चरणों में सोने के नूपुर झंकार करते हैं।

चलिते हेर-इ उलटिया चलन-माधुरी मिश्र देखे दाण्डा-इया
अर्थ

घुटनों के बल चलते हुए शिशु मुड़कर देखते हैं। जगन्नाथ मिश्र खड़े होकर उनकी चाल की मधुरता को निहारते हैं।

समुखे आसिया कहे माय कोले चडसिया बाप धूलि लागे गाय
अर्थ

पिता के सामने आकर शिशु कहते हैं, “माँ!” पिता उन्हें उठाकर गोद में बैठाते हैं और उनके शरीर से धूल झाड़ते हैं।

जननीर हाते हात दिया कोले उठे लहु लहु हासिया हासिया
अर्थ

फिर पिता बालक को उनकी माँ के हाथों में सौंप देते हैं। धीरे-धीरे हँसते-हँसते बालक माँ की गोद में खड़े हो जाते हैं।

दुग्ध-बिन्दु सम दन्त-ज्योति हासिते प्रकाश ताय केबा धरे धृति
अर्थ

उनके दाँतों की चमक दूध की बूँदों जैसी है। जब वे मुस्कुराते और हँसते हैं, तब कौन शान्त और उदासीन रह सकता है?

दुटी आङ्खे यार पाने चाय तारे निरन्तर सुख-समुद्रे भासाय
अर्थ

पुत्र के रूप को आँखों से पीती हुई माँ ने अपने को सदा आनन्द के सागर में तैरता हुआ अनुभव किया।

जननीरे कोले भाल शोहे नरहरि निछनि भुबन-मन-मोहे
अर्थ

माँ की गोद में वह बालक शोभायमान और महिमामय है। नरहरि उस बालक की पूजा करते हैं, जो सारे संसार का मन मोह लेता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
10