Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जेइ रति जन्मे जार सेइ मत रस तार

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जेइ रति जन्मे जार सेइ मत रस तार रस मुख्य पञ्च-बिध होय गौण-सप्त-रस पुनः होय रतिर अनुगुण रतिर सम्बन्ध भाबाश्रोय
अर्थ

जिस जीव में जैसी रति जन्म लेती है, उसका रस भी वैसा ही होता है। मुख्य रस पाँच प्रकार के हैं। सात गौण रस उसी मुख्य रति के अनुसार चलते हैं। ये सब भाव रति के सम्बन्ध पर ही टिके हैं।

पञ्च मुख्य मध्ये भाइ मधुरेर गुण गाइ सर्ब-श्रेष्ठ रस-राज बोलि गुण अन्य रसे जत मधुरेते आछे तत आर बहु बले होय बलि
अर्थ

हे भाइयों, अब मैं माधुर्य रस की महिमा का गान करूँगा। मैं कहता हूँ कि यही सब रसों में सर्वश्रेष्ठ है, रसराज है। अन्य सभी रसों के गुण माधुर्य रस में विद्यमान हैं, और उन्हीं की शक्ति से यह और भी बलवान बन जाता है।

गौण रस आछे जत सब सञ्चारीर मत हय स्र्ङ्गरेर पुष्टि कोरे श्री-रूपेर अनुगत भजने जे होय रत स्थिति तार केबले मधुरे
अर्थ

जितने भी गौण रस हैं, वे सब संचारी भावों जैसे हैं और माधुर्य (शृंगार) रस को पुष्ट करते हैं। जो श्रील रूप गोस्वामी के अनुगत होकर भजन में लगे हैं, वे केवल माधुर्य रस में ही स्थित रहते हैं।

मधुर उज्ज्वल-रस सदा शृङ्गारेर बश ब्रज-रज-नन्दन बिषोय ऐश्वर्ज सु-गुप्त त'ते माधुर्ज-प्रभाबे मते ताहार आश्रोय भक्त-चोय
अर्थ

माधुर्य रस अत्यंत उज्ज्वल और मधुर है। कृष्ण सदा इसी रस के अधीन रहते हैं। इसमें कृष्ण का ऐश्वर्य छिपा रहता है और उनकी मधुरता खुलकर चमकती है। इस रस में भक्त प्रेम करने वाले (आश्रय) हैं, और व्रज के राजकुमार कृष्ण उनके प्रेम के विषय हैं।