Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कबे तव करुना प्रकाशे

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गुरुदेव्! कबे तव करुना-प्रकाशे श्री-गौराङ्ग-लीला, होय नित्य-तत्त्व, एइ दृढ विश्वासे `हरि हरि’ बोलि’, गोद्रुम-कानने, भ्रोमिबो दर्शन-आशे
अर्थ

हे गुरुदेव! आपकी कृपा के प्रकट होने से मुझे कब यह दृढ़ विश्वास होगा कि श्री गौरांग की लीला नित्य सत्य है, और कब मैं 'हरि हरि' पुकारते हुए उन लीलाओं के दर्शन की आशा में गोद्रुम के वन में घूमूँगा?

निताइ, गौराङ्ग, अद्वैत, श्रीवास, गदाधर,—पञ्च-जन कृष्ण-नाम-रसे, भासा’बे जगत्, कोरि’ महा-सङ्कीर्तन
अर्थ

नित्यानन्द प्रभु, गौरांग महाप्रभु, अद्वैत प्रभु, श्रीवास ठाकुर और गदाधर पंडित, ये पाँच महापुरुष महासंकीर्तन करते हुए सारे जगत को कृष्ण-नाम के रस में सराबोर कर देंगे।

नर्तन-विलास, मृदङ्ग-वादन, शुनिबो आपन-काने देखिया देखिया, से लीला-माधुरी, भासिबो प्रेमेर बने
अर्थ

मैं अपने ही कानों से मृदंग की ध्वनि और उनके नृत्य-विलास को सुनूँगा। उन लीलाओं की मधुरता को देख-देखकर, मैं प्रेम की बाढ़ में तैरता रहूँगा।

ना देखि’ आबार, से लीला-रतन, काँदि हा गौराङ्ग! बोलि’ आमारे विषयी, पागल बोलिया, अङ्गेते दिबेक धूलि
अर्थ

फिर उन रत्न-तुल्य लीलाओं को न देख पाकर, मैं 'हा गौरांग!' पुकारकर रोऊँगा। संसारी लोग मुझे पागल समझकर मेरे शरीर पर धूल फेंकेंगे।

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।