Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कलि तिमिराकुल अखिल लोक देखि

कलि तिमिराकुल अखिल लोक देखि बदन-चान्द परकाश लोचने प्रेम सुधा-रस रबि खये जग-जन-ताप-बिनाश
अर्थ

सब लोगों को कलियुग के अँधेरे में खोया हुआ देखकर भगवान चैतन्य ने इस संसार में अपने मुख-चन्द्र को उदित किया। जब इस जगत् की आँखों ने उस चन्द्रमा की अमृतमयी चाँदनी, दिव्य प्रेम की चाँदनी, का आस्वादन किया, तब सबको अनुभव हुआ कि उनके जलते हुए दुःख नष्ट हो गए हैं।

टेक
गौर करुणा-सिन्धु अबतार निज नाम गान्थिया नाम चिन्तामणि जगते परा-ओल हार
अर्थ

करुणा के सागर भगवान गौर इस संसार में अवतरित हुए। अपने ही पवित्र नामों के चिन्तामणि रत्नों को लेकर उन्होंने एक बहुत बड़ा हार गूँथा, और वह हार उन्होंने इस जगत् के लोगों को पहना दिया।

भकत कलप-तरु अन्तरे अन्तरु रोपये ठामहि ठाम तछु पद-तले अबलम्बन पथिक पूरये निज निज काम
अर्थ

भगवान चैतन्य ने अपने भक्तों के चरण-रूपी कल्पवृक्ष के नीचे विश्राम का स्थान बनाया। वहाँ आश्रय लेकर इस संसार में यात्रा करने वाले जीव अपनी सब कामनाएँ पूर्ण पाते हैं।

भाब गजेन्द्र चडा-ओल अकिञ्चन ऐछन पहुंक बिलास संसार कालकूट बिषे दगधल एकलि गोबिन्द दास
अर्थ

दिव्य प्रेम के राजसी हाथी ने उन भक्तों को, जिनके लिए कृष्ण ही एकमात्र धन हैं, उठाकर भगवान कृष्ण की लीलाओं में पहुँचा दिया है। केवल गोविन्द दास पीछे छूट गया है। जन्म-मृत्यु के इस संसार में रहकर वह विष की ज्वाला में जल रहा है।

इस भजन के बारे में

पद
4