Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पद तले भकत कलप तरु सिञ्चित पद मकरन्द

पद-तले भकत-कलप-तरु सिञ्चित पद-मकरन्द य कर छाय सुरासुर नर-बर परमानन्द निरबन्ध
अर्थ

भक्त चलते-फिरते कल्पवृक्ष हैं, ऐसे वृक्ष जिनके चरणों में अमृत से भरे फूल हैं। उन वृक्षों की छाया में देवता, मनुष्य और असुर आनन्दमय आश्रय पाते हैं।

टेक
पेखलु गौरचन्द्र नट-राज जङ्गम हेम धराधर उयल किये नबद्वीप माझ
अर्थ

मैंने भगवान गौरचन्द्र को देखा, जो नर्तकों के राजा हैं। नवद्वीप के बीच सोने का सुमेरु पर्वत अचानक कैसे प्रकट हो गया?

नयन-नीर जनित मन्दाकिनी भुबन भरल तरङ्गे नित्यानन्द चन्द्र गौर दिनमणि भ्रम-इ प्रदक्षिण रस-रङ्गे
अर्थ

उनकी आँखों से आँसुओं की एक स्वर्गीय गंगा बह निकली, ऐसी गंगा जिसकी लहरों ने संसार को भर दिया। चन्द्रमा-स्वरूप भगवान नित्यानन्द और सूर्य-स्वरूप भगवान गौर ने अमृतमय नृत्य-मण्डल में नृत्य किया।

या कर चरण समाधिये शङ्कर चतुरानन करु आश सो पहुं पतित कोरे करि कान्दये कि कहब गोबिन्द-दास
अर्थ

भगवान शिव उन दोनों के चरणों का ध्यान करते हैं। चार मुखों वाले भगवान ब्रह्मा उनसे मिलने की अभिलाषा रखते हैं। ये दोनों प्रभु, भगवान चैतन्य और भगवान नित्यानन्द, पतित जीवों को गले लगाकर रोते हैं। गोविन्द दास और क्या कहे?

इस भजन के बारे में

पद
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