Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

करङ्ग कौपीन लञा छेँड काँथा गाय दिया

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करङ्ग कौपीन लञा छेँड काँथा गाय दिया तेयागिब सकल बिषया कृष्णे अनुराग हबे ब्रजेर निकुञ्जे कबे जाइया करिब निजालय
अर्थ

कब मैं सभी भोग-विषयों को त्यागकर, केवल करवा और कौपीन लेकर, फटी कंथा शरीर पर डालूँगा? कब व्रज के निकुंजों में जाकर वहीं अपना घर बनाऊँगा, और मेरे मन में कृष्ण के प्रति अनुराग जागेगा?

हरि हरि! कबे मोर हैबे सु-दिन ! फलमूल बृन्दाबने खाञा दिबा-अबसाने भ्रमिव हैया उदासीन
अर्थ

हे हरि! हे हरि! मेरा वह शुभ दिन कब आएगा, जब मैं वृन्दावन में विरक्त होकर विचरण करूँगा, और दिन के अंत में केवल फल-मूल खाकर जीवन बिताऊँगा?

शीतल जमुना जले स्नान करि कूतूहले प्रेमाबेशे आनन्दित हञा बाहुर उपर बाहु तुलि वृन्दावने कुलि कुलि कृष्ण बलि बेडाब काँदिया
अर्थ

यमुना के शीतल जल में आनंद से स्नान करके, कब मैं प्रेम में विभोर हो उठूँगा? कब मैं वृन्दावन की गली-गली में दोनों बाँहें ऊपर उठाकर 'कृष्ण! कृष्ण!' पुकारता हुआ रोता फिरूँगा?

देखिब सङ्केत-स्थान जुडाबे तापित प्राण प्रेमाबेशे गडगडि दिब काँहा राधा! प्राणेश्वरि! काँहा गिरिबर-धारि! काँहा नाथ ! बलिया डाकिब
अर्थ

कब मैं वह संकेत-स्थल देखूँगा, जहाँ राधा-कृष्ण छिपकर मिलते थे, और मेरे तपते प्राण शीतल होंगे? कब प्रेम में विभोर होकर मैं वहाँ धूल में लोटूँगा, और पुकारूँगा: 'हे राधा, हे मेरे प्राणों की स्वामिनी, कहाँ हो? हे गिरिधारी, कहाँ हो? हे नाथ, कहाँ हो?'

माधवी-कुञ्जेर परि सुखे बसी शुक-शारी गाइबेक राधा-कृष्ण-रस तरु-मूले बसि ताहा शुनि जुडाइब हिया कबे सुखे गोञाब दिबस
अर्थ

माधवी-लता के कुंज में शुक और सारी सुख से बैठकर राधा-कृष्ण की रस-लीला गाएँगे। कब मैं वृक्ष की जड़ के पास बैठकर उसे सुनूँगा, अपना हृदय शीतल करूँगा, और सुख से दिन बिताऊँगा?

श्री-गोविन्द गोपीनाथ श्रीमती-राधिका-साथ देखिब रतन-सिंहासने दीन नरोत्तम दास करये दुर्लभ आश ए-मति हैबे कत दिने
अर्थ

कब मैं गोपियों के स्वामी श्री गोविन्द को श्रीमती राधिका के साथ रत्न-सिंहासन पर बैठे देखूँगा? दीन नरोत्तम दास यह दुर्लभ आशा करते हैं: ऐसा दिन कब आएगा?