Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

खेलत फागु बृन्दाबन चन्द

खेलत फागु बृन्दाबन-चन्द ऋतु-पति मनमथ मनोरथ छन्द
अर्थ

वृन्दावन का चन्द्रमा रंगों का उत्सव खेल रहा है; ऋतुओं का स्वामी वसन्त यहाँ कामदेव की ही इच्छा को साकार रूप देता है।

सुन्दरी-गण कर-मण्डली-माझ रङ्गिणी प्रेम-तरङ्गिणी साज
अर्थ

सुन्दरियों के हाथों से बने घेरे के बीच, प्रेम-तरंगों की रंगीली नदी सजी हुई है।

आगु फागु दे-इ नागरी नयने अबसरे नागर चुम्बये बयने
अर्थ

नायिका उनकी आँखों की ओर रंग लगाती है; अवसर पाकर नायक उसके मुख को चूम लेता है।

चकित चन्द्र-मुखी सहचरी गहने धा-इ धा-ओल गिरिधरिक एक सने
अर्थ

चौंककर चन्द्रमुखी सखियाँ एक साथ दौड़कर गिरिधारी पर टूट पड़ती हैं।

तरल नयनी तुरिते एक या-इ करे सने काड़ि मुरली ले-इ धा-इ
अर्थ

एक चंचल-नयनी शीघ्रता से उनके पास जाती है; उनके हाथ से बाँसुरी छीनकर वह उसे लेकर भाग जाती है।

घन करताली भालि भालि बोल हो हो होरी तुमुल उतरोल
अर्थ

जोर से ताली बजती है, "वाह वाह!" के स्वर गूँजते हैं, "हो, होरी!" का कोलाहल चारों ओर उठ खड़ा होता है।

अरुण तरुण तरु अरुणहि धरणी स्थल जल-चर भेल सबे एक-बरणी
अर्थ

युवा वृक्ष लाल हो उठते हैं, धरती लाल हो उठती है; जल और थल के सभी जीव एक ही रंग में रँग जाते हैं।

अरुणहि नीरे अरुण अरबिन्द अरुण हृदये भेल दास गोबिन्द
अर्थ

लाल जल में एक लाल कमल तैर रहा है; और गोविन्द दास का हृदय भी प्रेम से लाल हो उठा है।

इस भजन के बारे में

पद
8