Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

ऐछन बचन कहल

ऐछन बचन कहल यब कान ब्रज-रमणी-गण सजल नयान
अर्थ

जब कान्हा ने ऐसे वचन कहे, तो व्रज की स्त्रियों की आँखें भर आईं।

टूटल सबहु मनोरथ कारणि अबनत आनने नखे लिखु धरणि
अर्थ

उनकी सारी मनोकामनाएँ टूट गईं, वे मुख झुकाए अपने नाखूनों से धरती पर रेखाएँ खींचने लगीं।

आकुल अन्तर गदगद कह-इ अकरुण बचन बिशिख नाहि सह-इ
अर्थ

व्याकुल हृदय और अवरुद्ध कंठ से वे बोलीं: "तुम्हारे निर्दय वचन, जो बाण के समान तीखे हैं, हम सहन नहीं कर सकतीं।"

शुन शुन सु-कपट श्यामर चान्द कैछे कहसि तुहु इह अनुबन्ध
अर्थ

"सुनो, सुनो, हे कपटी श्यामचन्द्र, इतना गहरा बन्धन होने पर भी तुम ऐसी बात कैसे कह सकते हो?"

भाङ्गहि कुल-शील मुरलीक-गाने किङ्किणी-गण जनु केश धरि आने
अर्थ

"तुमने अपनी मुरली के गीत से हमारी कुल-मर्यादा और शील तोड़ दिया, और हमें ऐसे खींच लाए मानो दासियों को बाल पकड़कर लाया जाता है।"

अब कह कपटे धरम-युत बोल धार्मिक हरये किये कुमारी निचोल
अर्थ

"अब तुम छल से धर्म की बातें करते हो। क्या कोई धर्मात्मा कुमारियों के वस्त्र चुराता है?"

तोहे सोंपित जीब तुया रस पाब तुया पद छोड़ि अब को काँह याब
अर्थ

"तुम्हारे प्रेम का रस पाने के लिए हमने अपना जीवन तुम्हें सौंप दिया है; अब तुम्हारे चरण छोड़कर हम और कहाँ जाएँ?"

एतहु कहत ब्रज-युबती मेल शुनि नन्द-नन्दन हरषित भेल
अर्थ

व्रज की तरुणियों को इस प्रकार एकसाथ बोलते सुनकर नन्द-नन्दन हर्षित हो उठे।

कबि परसाद ताहि करये बिलास आनन्दे निरखये गोबिन्द-दास
अर्थ

कवि की कृपा से आशीर्वादित होकर वे वहाँ विलास करते हैं; गोविन्द दास यह सब आनंदपूर्वक निहारते हैं।

इस भजन के बारे में

पद
9