Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
दिखाएँ
टेक्स्ट
कि आर बोलिबो तोरे मन मुखे बोलो प्रेम प्रेम बस्तुतः त्यजिया हेम शून्य-ग्रन्थ अञ्चले बन्धन
अर्थ

हे मन, तुझसे और क्या कहूँ? तू मुख से 'प्रेम, प्रेम' कहता रहता है, परन्तु सच यह है कि तूने स्वर्ण को त्याग दिया है, और तेरी गठरी खाली ही बँधी रह गई है।

अभ्यासिया अश्रु-पात लम्फ झम्फ अकस्मात मूर्च्छ-प्राय थाकहो पडिया ए लोक बञ्चिते रङ्ग प्रचारिया असत्-सङ्ग कामिनी-कञ्चन लभ गिया
अर्थ

अभ्यास से आँसू बहाते हुए, अकारण उछलते-कूदते, तू मूर्छित होकर गिर पड़ता है। इस नाटकबाजी से तू लोगों को छलता है, दुष्ट संगति का प्रचार करता है, और स्त्री तथा धन के पीछे भागता है।

प्रेमेर साधन-भक्ति ता'ते नोइल अनुरक्ति शुद्ध प्रेम केमोने मिलिबे दश-अपराधा त्यजि' निरन्तर नाम भजि' कृपा ह'ले सु-प्रेम पाइबे
अर्थ

प्रेम प्राप्ति के साधन, अर्थात् साधन-भक्ति में तेरी कोई रुचि नहीं, तो शुद्ध प्रेम तुझे कैसे मिलेगा? दस अपराधों को त्यागकर सदा हरिनाम की भक्ति कर। जब नाम की कृपा होगी, तभी तुझे सच्चा प्रेम प्राप्त होगा।

न मानिले सु-भजन साधु-सङ्गे सङ्कीर्तन न कोरिले निर्जने स्मरण न उठिया बृखोपरि टानाटानि फल धोरि' दुष्ट-फल कोरिले अर्जन
अर्थ

तू न तो साधुओं की संगति में भगवान का सुभजन और संकीर्तन करता है, न ही एकान्त में उनका स्मरण करता है। वृक्ष पर चढ़े बिना ही फल को खींच-खींचकर पाने की चेष्टा करता है, इसलिए तुझे केवल बुरा फल ही मिला है।

अकैतब कृष्ण-प्रेम जेन सु-बिमल हेम सेइ फल नृ-लोके दुर्लभ कैतबे बाञ्चन-मात्र हओ आगे जोग्य-पात्र तबे प्रेम होइबे सुलभ
अर्थ

सच्चा कृष्ण-प्रेम शुद्ध स्वर्ण के समान है, यह फल मनुष्य-लोक में अत्यन्त दुर्लभ है। जो तू कर रहा है, वह तो मात्र छलावा है। पहले उस प्रेम के योग्य पात्र बन, तब वह प्रेम तुझे सहज ही प्राप्त हो जाएगा।

कामे प्रेमे देखो भाइ लकणेते भेद नाइ तबु काम प्रेम नाहि होय तुमि तो' बरिले काम मिथ्या ताहे प्रेम नाम आरोपिले किसे शुभ होय
अर्थ

हे भाई, देख, काम और प्रेम के बाहरी लक्षणों में कोई अन्तर नहीं दिखता, फिर भी काम कभी प्रेम नहीं बन सकता। तूने वस्तुतः काम को ही चुना है, और मिथ्या रूप से उसे 'प्रेम' का नाम दे दिया है। ऐसा करने से कल्याण कैसे हो सकता है?