नाचे गौराङ्गचान्द बिभोर भाबेते
भावविभोर होकर भगवान गौरांगचन्द्र नृत्य करते हैं। उसी भाव से भरकर गदाधर उनकी बायीं ओर नृत्य करते हैं।
प्रेमभाव से अभिभूत होकर भगवान गौर का पग डगमगा जाता है। उनका सुवर्ण शरीर भूमि पर गिर जाता है। उनके पीछे भगवान निताईचन्द्र मुड़कर नृत्य करते हैं।
झूमते हुए मेरे भगवान गौरांग नृत्य करते हैं। खोल और करताल बज उठते हैं, ताधिया! ताधिया!
भगवान् गौरांग भटके हुए पापियों को पकड़कर अपनी बाहों में भर लेते हैं। हाय! अधम नरहरि इन लीलाओं के अमृत में नहीं डूबा।