Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
दिखाएँ
टेक्स्ट
1 टेक
नाचे शचीर दुलाल रङ्गे अद्वैत निता-इ गदाधर श्रीबासादि परिकर सङ्गे
अर्थ

अद्वैत आचार्य, निताई प्रभु, गदाधर, श्रीवास तथा अन्य अनेक सहचरों से घिरे हुए शची के पुत्र आनंदपूर्वक नृत्य करते हैं।

अङ्ग-भङ्गी कि मधुर-छान्दे पद-भरे मही-करे ठलमल, के ताहे धैरज बान्धे
अर्थ

उनके अंग कैसी मधुर सुंदरता से हिलते हैं! उनके अधीर नाचते चरण पृथ्वी की सतह को स्पर्श करते हैं। अब कौन शांत और स्थिर रह सकता है?

नाना ताले दिया करतालि गोबिन्द माधब बासु यश गाय चौदिके शोभये भालि
अर्थ

करताल अनेक प्रकार की तालों में बजते हैं। गोविन्द, माधव और वासु प्रभु की महिमा का गान करते हैं। चारों दिशाएं महिमा से भर जाती हैं।

गोरा चन्द-मुखे हरि बोले जगा-इ माधा-इ हेरि बाहु प्रसारि करये कोले
अर्थ

भगवान गौर के मुखचन्द्र से हरि! की पुकार निकलती है। जगाई और माधाई को देखकर भगवान गौर उन्हें अपनी बाहों में भर लेते हैं।

गोराचन्देर परश पाञा जगा-इ माधा-इ नाचे भुज तुलि भाबेते बिभोल हैञा
अर्थ

भगवान गौरचन्द्र के स्पर्श से जगाई और माधाई प्रेमभाव से भर जाते हैं। अपनी बाहें उठाकर वे नृत्य करने लगते हैं।

दोहे लोटाय धरणी-तले काम्पे तनु अनुपम पुलकित तितये आङ्खेर जले
अर्थ

फिर वे भूमि पर लोटने लगते हैं। वे कांपते हैं। उनके रोम रोम पुलकित हो उठते हैं। उनकी आंखों से अश्रु बहने लगते हैं।

गोरा-करुणा प्रकाश देखि नाचे सुर-गण गगनेते रहि सघने जुडाय आङ्खि
अर्थ

भगवान गौर की कृपा का यह प्रकाश देखकर देवगण आकाश में नृत्य करते हैं। उनकी आंखें शीतल आनंद से भर जाती हैं।

के ना धाय से करुणा-आशे जय जय ध्वनि अबनी भरल भणे घनश्याम-दासे
अर्थ

भगवान गौर की कृपा पाने के लिए कौन नहीं दौड़ेगा? सारा संसार जय! जय! की ध्वनि से भर जाता है। यह घनश्याम दास कहते हैं।