फाल्गुन पूर्णिमा मङ्गलेर सीमा
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन जब परम मंगलमय गोकुल के चन्द्रमा नदिया-नगर में प्रकट हुए, तब घर-घर में आनन्द का सागर उमड़ पड़ा।
शची ने नवजात पुत्र को गोद में लेकर निहारा। दोनों आनन्द से भर गए। प्रसूति-कक्ष तेजस्वी शोभा से भर गया।
बालक को देखने के लिए चारों दिशाओं से सब दौड़ पड़े। किसी को चैन नहीं था। ग्रहण के अन्धकार में कौन किसी को देख सकता था? असंख्य लोग आए।
शिशु की मधुरता देखकर सबने आँखें भर-भरकर उसे निहारा। वे अपने शरीर को भी भूल गए। नरहरि कहते हैं: सब लोग शची के नवजात पुत्र के प्रेम में क्यों पड़ गए?
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरहरि दास
- पद
- 4