Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पूर्णिमा रजनी चाँद गगने उदय

पूर्णिमा रजनी चाँद गगने उदय चाँद हेरि गोराचाँदेर हरिष हृदय
अर्थ

सन्ध्या के आकाश में पूर्णिमा का चन्द्रमा उदय होता है। चन्द्रमा को देखकर बालक गौरचन्द्र का हृदय हर्ष से भर जाता है।

चाँद दे मा बलि शिशु काँदे उभराय हात तुलि शची डाके आय चाँद आय
अर्थ

“माँ, मुझे चाँद दे दो!” वे जोर-जोर से माँगते हैं। बाँहें उठाकर माता शची पुकारती हैं, “ओ चाँद, यहाँ आओ! यहाँ आओ!”

ना आसे निठुर चाँद निमा-इ ब्याकुल काँदिया धूलाय पड़े हाते छिँड़े चुल
अर्थ

निष्ठुर चन्द्रमा नहीं आता। निमाई बहुत व्याकुल हो उठते हैं। वे रोते हैं और धूल में गिर पड़ते हैं। अपने ही हाथों से वे अपने सिर के बाल उखाड़ने का प्रयास करते हैं।

राधा-कृष्ण-चित्र एक मिश्र-गृहे छिल पुत्र शान्त-इते शची ताहा हाते दिल
अर्थ

जगन्नाथ मिश्र के घर से शची राधा और कृष्ण का एक चित्र लाती हैं। शची अपने हाथ से पुत्र को सहलाकर उन्हें शान्त करती हैं।

चित्र पाया गोराचाँदेर मने बड़ सुख बसु कहे पटे पाछुँ हेर निज-मुख
अर्थ

चित्र को थामकर बालक गौरचन्द्र के हृदय में बड़ा आनन्द होता है। वासुदेव घोष कहते हैं: चित्र को निहारते हुए भगवान गौरचन्द्र को उसमें अपना ही मुख दिखाई देता है।

इस भजन के बारे में

राग
बेलोयार राग, दशकोशी
पद
5