राधा कृष्ण गुण गान मिथासक्ति सम्बर्धन
1. श्री श्री राधा-कृष्ण की महिमा का गान करना, 2. राधा-कृष्ण को परस्पर और अधिक अनुरक्त करना, 3. दोनों के गुप्त मिलन की व्यवस्था करना, 4. सखियों को कृष्ण को समर्पित करना, 5. मधुर हास-परिहास की बातें कहना, 6. दोनों को वस्त्राभूषणों से सजाना, . . .
. . . 7. दोनों के हृदय में परस्पर जो प्रेम है, उसे प्रकट करना, 8. दोनों के दोषों को छिपाना, 9. शत्रुभाव रखने वाले लोगों को छलना, 10. शुभ परामर्श देना, 11. दोनों के मिलन की व्यवस्था करना, 12. पंखा झलना और ऐसी ही अन्य सेवाएँ करना, . . .
. . . 13. दोनों का ध्यान करना, 14. भूल होने पर उसके प्रायश्चित्त हेतु उपहार देना, 15. दोनों के परस्पर पत्र ले जाना, और 16. राधा के संकट या विपत्ति के समय अत्यंत कुशलता से उनके प्राणों की रक्षा करना, ये सामान्य सखियों के कर्तव्य हैं।
किसी सखी की जो विशेष सेवा है, वह उचित अवसर पर ही प्रकट होगी। श्रील रूप गोस्वामी के अनुयायी जिस सखी की सेवा-भाव में भजन करते हैं, वे उस सखी की सेवा को ही अपनी सेवा मानकर उसका अनुसरण करते हैं।