Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधा कृष्ण गुण गान मिथासक्ति सम्बर्धन

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राधा-कृष्ण-गुण-गान मिथासक्ति सम्बर्धन उभयाभिसार सम्पदन कृष्ण सखी-समर्पण नर्म-बाक्य-आस्वादन उभयेर सुबेश-रचन
अर्थ

1. श्री श्री राधा-कृष्ण की महिमा का गान करना, 2. राधा-कृष्ण को परस्पर और अधिक अनुरक्त करना, 3. दोनों के गुप्त मिलन की व्यवस्था करना, 4. सखियों को कृष्ण को समर्पित करना, 5. मधुर हास-परिहास की बातें कहना, 6. दोनों को वस्त्राभूषणों से सजाना, . . .

चित्त-भाब-उत्गतन मिथ-च्छिद्र सङ्गोपन प्रतीप जनेर सुबञ्चन कुशल शिखण आर सम्मिलन दु'जनर ब्यजनादि बिबिध सेबान
अर्थ

. . . 7. दोनों के हृदय में परस्पर जो प्रेम है, उसे प्रकट करना, 8. दोनों के दोषों को छिपाना, 9. शत्रुभाव रखने वाले लोगों को छलना, 10. शुभ परामर्श देना, 11. दोनों के मिलन की व्यवस्था करना, 12. पंखा झलना और ऐसी ही अन्य सेवाएँ करना, . . .

उभय कुशल ध्यान दोषे तिरस्कार दान परस्पर सन्देश बाहन राधिकार दशा-काले प्राण-राख सु-कौशले सखी-साधारणकार्ज जन
अर्थ

. . . 13. दोनों का ध्यान करना, 14. भूल होने पर उसके प्रायश्चित्त हेतु उपहार देना, 15. दोनों के परस्पर पत्र ले जाना, और 16. राधा के संकट या विपत्ति के समय अत्यंत कुशलता से उनके प्राणों की रक्षा करना, ये सामान्य सखियों के कर्तव्य हैं।

जेब जे सखीर कार्ज बिशेष बोलिया धर्ज प्रदर्शित ह'बे जथा-स्थाने रूपानुग भजे जेब जे सखीर जेइ सेबा तद्-अनुग सेइ सेबा माने
अर्थ

किसी सखी की जो विशेष सेवा है, वह उचित अवसर पर ही प्रकट होगी। श्रील रूप गोस्वामी के अनुयायी जिस सखी की सेवा-भाव में भजन करते हैं, वे उस सखी की सेवा को ही अपनी सेवा मानकर उसका अनुसरण करते हैं।