राधे! पुष्पोद्याने गिया कुसुम चयने
हे राधे! हम सब फूलों के उपवन में जाकर फूल चुनने में लग जाएँगी। तभी कृष्ण वहाँ आकर हमें फूल-चोर कहेंगे और आपको पकड़ लेंगे।
कब आप हरि से कहेंगी, "यहाँ मेरी अधिकारिणी वृन्दा सखी हैं। आपको कौन मानता है? यहाँ मत आइए, पराई स्त्रियाँ फूल चुन रही हैं।"
कृष्ण कहेंगे, "ढीठ स्त्रियो! अब तुम मेरी हो। तुम सबको पकड़कर मैं वहाँ ले जाऊँगा जहाँ कन्दर्प नाम का राजा रहता है!"
वे नागर-श्रेष्ठ मेरे हाथ से फूलों की डलिया छीन लेंगे। सबके सामने वे आपकी दुहाई देंगे, और रसिक-श्रेष्ठ आपको ले जाएँगे।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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- सेवा लालसा
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- पद
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