Vaishnava Songs
भजन-ग्रन्थ

सेवा लालसा

सेवा लालसा में 16 भजन हैं, जिनके रचयिता भक्तिविनोद ठाकुर हैं, जो 4 अध्यायों में सजे हैं।

सेवा लालसा ("सेवा की उत्कण्ठा") श्रील भक्तिविनोद ठाकुर की एक दुर्लभ गीत-माला है। यह उनके अप्रकट होने के बाद ही छपी, जब श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर ने इसे सज्जन-तोषणी (खण्ड 21, 1918) में प्रकाशित किया। हर गीत में एक दासी (मंजरी) श्रीमती राधारानी को सम्बोधित करती है और दिन भर की लीलाओं में उनकी सेवा की लालसा प्रकट करती है: रात्रि का अन्त, प्रातःकाल, पूर्वाह्न और मध्याह्न। पाठ मध्याह्न-लीला में ही रुक जाता है, इसलिए या तो यह अधूरा रह गया या इसका बाद का भाग खो गया। सोलह गीत उपलब्ध हैं, हर समय के चार। ये रागानुगा-भक्ति के गोपनीय गीत हैं, जिन्हें किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में सुनना और पढ़ना ही उचित है।

16 भजन

भजन