राधे! तबे गोवर्धने धेनु मित्र राखि
हे राधे! तब गोवर्धन पर गायों और सखाओं को छोड़कर, हरि तरह-तरह के बहाने बनाकर सुबल और मधुमंगल को साथ लेकर राधाकुण्ड की ओर चल पड़े।
आपके प्रेम में बँधे कृष्ण को आपको छोड़कर सुख नहीं मिलता। आपको न देखें तो वे विरह में व्याकुल होकर बहुत दुःख पाते हैं।
तुलसी को और मुझे देख-देखकर उनका साहस बहुत बढ़ गया है। हँसी-ठिठोली में बड़े चतुर वे राधाकुण्ड पर आपके उपवन में चले गए हैं।
चलिए, हम सब आगे बढ़कर चलें और कृष्ण से परिहास करें! आपकी जीत होगी, और तब हम सब परम उल्लास से भर जाएँगी।
इस भजन के बारे में
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- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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