राधे! कृष्ण कथा शुनि दादा बलराम
हे राधे! (और सुनिए) कृष्ण की बात सुनकर दादा बलराम बड़े पुलकित होकर कहते हैं, "हे भाई कृष्ण, तुम्हें न देखूँ तो मेरा बल ही नहीं रहता...
"...कौन जाने, तुम्हारे न दिखने पर कोई असुर गो-धन चुरा ले। तुम्हारे सखा कितना कष्ट पाएँगे और हरि को ही याद करते रहेंगे...
"...तुम वन में अकेले घूमोगे, साथ कोई न होगा, तो मुझे चिन्ता होगी। शत्रुओं का दल भारी है, तुम्हें कष्ट देगा। मैं, शत्रुओं का संहारक, तुम्हारे साथ चलता हूँ।"
कृष्ण कहते हैं, "दादा, आपके प्रताप से मैं किसी से नहीं डरता। यदि कंस भी आ जाए तो मैं उसका नाश कर दूँगा। आप यहीं रहकर गायों की रक्षा कीजिए।"
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- सेवा लालसा
- भाव
- पद
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