राधे! तथा नीलमणि गो-दोहन सारि
हे राधे! वहाँ नीलमणि (कृष्ण) गायें दुहकर और स्नान आदि पूरा करके, कनखियों से आपको देखकर अपनी माँ को पुकार लाते हैं।
वे कहते हैं, "हे माँ, मुझे भूख लगी है! दिन बहुत चढ़ आया है। मुझे भोजन कराओ; मैं गायों, बछड़ों और सखाओं को लेकर गो-चारण के लिए जाऊँगा।"
सब बैठकर भोजन करेंगे और आपके पकाए अन्न की खूब प्रशंसा करेंगे। फिर भरपूर विश्राम करके हरि वन को जाएँगे।
तब माँ यशोदा बड़े सुख से कृष्ण का अवशेष आपको खिलाएँगी। आपकी सब सखियाँ भी प्रसाद पाएँगी, और हम यावट की ओर चल देंगी।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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- पद
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