Nandgram Dham
Nandgram Dham Vaishnava Songs · nandgramdham.org/songs

र इ हे अब तेजह मन

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

र-इ हे अब तेजह मन चरने लगि तोहे सधये कन
अर्थ

हे राधे, अब अपना यह मान त्याग दो। कृष्ण तुम्हारे चरणों में गिरकर विनती कर रहे हैं।

बदन न कर मलिन छन्द बदे कि अ-ओये पुनिमक चन्द
अर्थ

अपने मुख की शोभा खोकर उसे मलिन मत होने दो। क्या पूर्णिमा का चाँद कभी धुँधला होकर उगता है?

अधर बन्धुलि मधुर हस निरस न कर दिरघ निसस
अर्थ

बंधूली पुष्प-से लाल तुम्हारे अधर और तुम्हारी मधुर मुस्कान को लंबी, भारी आहों से उदास मत करो।

चन्चल नयन खन्जन जोर भङ्ग-भुजङ्गम रहु अगोर
अर्थ

तुम्हारे चंचल नेत्र खंजन पक्षियों के जोड़े समान हैं। उनके सामने भौंहों के बल का कुंडलित सर्प मत रहने दो।

कि फल मोहे एतहु रोस जगते बिदित दसक दोस
अर्थ

मुझ पर इतना क्रोध करने से क्या लाभ? मेरे दोष तो सारे संसार को पहले से ही ज्ञात हैं।

बचन अमिय बिनु ये नहि जिये मन-कुलिस दरसयसि किये
अर्थ

तुम्हारे वचनों के अमृत बिना कोई जीवित नहीं रह सकता। फिर मुझे अपने मान की यह वज्र-सी कठोरता क्यों दिखा रही हो?

गोबिन्द-दस चिते ए-इ अस तेजन बरये मन अभिलस
अर्थ

गोविन्द दास अपने हृदय में बस यही एक आशा संजोए हैं, कि तुम्हारे मन की यह मान-अभिलाषा अंततः त्याग दी जाए।