Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

रसबती राधा रसमय कान

रसबती राधा रसमय कान को जाने कहे कयल तुहु मान
अर्थ

राधा रस की मूर्ति हैं, कृष्ण रस के मूर्तिमान स्वरूप हैं। कौन जान सकता है कि तुमने यह मान क्यों किया?

तुहु अति रोखे बिमुख ना बैठ दुहु बृन्दाबन-बन माह पैठ
अर्थ

तुम इतने क्रोधित होकर भी मुँह मोड़कर अलग नहीं बैठे। तुम दोनों वृन्दावन के वन में गहरे प्रवेश कर गए हो।

कि कहब रे सखि कह-इते हास किये किये अद्भुत दुहुक बिलास
अर्थ

क्या कहूँ, हे सखी! बोलते-बोलते ही हँसी आ जाती है, इन दोनों की लीला कितनी अद्भुत है, कितनी अद्भुत है!

लोचन लोरे भरि दुहु पन्थ पा-ओल तिमिर निकुञ्जक अन्त
अर्थ

आँखों में आँसू भरे दोनों राह पर चलते रहे, और कुंज के भीतर गहन अंधकार तक जा पहुँचे।

दुहु दुंह पुछ-इते दुहु मति बाम दुहु कहलि निज सहचरि नाम
अर्थ

जब दोनों ने एक-दूसरे से पूछताछ की, तो दोनों की मति उलटी चली; दोनों ने अपनी-अपनी सखी का नाम बता दिया।

भरमे कहत मरमक बोल सहचरि बोधे तुहु दुहु कर कोर
अर्थ

इस भ्रम में उन्होंने मर्म की बातें कह डालीं, और एक-दूसरे को अपनी सखी समझकर दोनों ने एक-दूसरे को अंक में भर लिया।

यब दुहु मेलि आलिङ्गन देल गोबिन्द-दास कहत किये भेल
अर्थ

जब दोनों मिलकर एक-दूसरे को आलिंगन में ले चुके, तो गोविन्द दास कहते हैं, फिर वहाँ क्या हुआ, यह कौन बता सकता है!

इस भजन के बारे में

पद
7