Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

रसेर आधार जिनि ताँर चित्ते रस खनि

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रसेर आधार जिनि ताँर चित्ते रस-खनि सेइ चित्तेर अबस्था बिशेषे श्रद्धा-निष्ठा-रुच्य्-आसक्ति क्रमे होय भाब-ब्यक्ति रति-नामे ताँहार निर्देशे
अर्थ

जिसका हृदय रसों का भण्डार है, रसों की रत्न-खान है, उसके हृदय में पहले श्रद्धा जागती है। फिर एक-एक करके निष्ठा, रुचि और आसक्ति आती हैं। इस तरह उसमें भाव प्रकट होता है, जिसे रति कहते हैं।

बिरुद्धाबिरुद्ध-भाब सर्बोपरि स्व-प्रभाब प्रोकाशिया लोय निज-बशे सकलेर आदि-पति हय शोभा पाय अति स्थायी भाब नाम पाय रसे
अर्थ

स्थायी भाव अपने अनुकूल (अविरुद्ध) और प्रतिकूल (विरुद्ध), दोनों प्रकार के भावों पर अपना प्रभाव प्रकट करके उन्हें अपने वश में कर लेता है। वह सबका आदि-स्वामी बन जाता है और परम शोभा को प्राप्त होता है। रस में यही सुंदर भाव 'स्थायी भाव' के नाम से जाना जाता है।

मुख्य-गौण-भेदे तार परिचोय द्वि-प्रकार मुख्य पञ्च गौण सप्त-बिध सन्त दास्य सख्य आर बात्सल्य मधुर सार एइ पञ्च रति मुख्याभिध
अर्थ

रस दो प्रकार के होते हैं, मुख्य और गौण। मुख्य रस पाँच हैं और गौण रस सात हैं। पाँच मुख्य रस ये हैं: शान्त, दास्य, सख्य, वात्सल्य और माधुर्य।

हास्याद्भुत बीर आर कोरुण ओ रौद्राकर भयानक-बीभत्स-बिभेदे रति सप्त गौणी होय सब कृष्ण-भक्ति-मोय शोभा पाय रसेर प्रभेदे
अर्थ

सात गौण रस ये हैं: हास्य, अद्भुत, वीर, करुण, रौद्र, भयानक और बीभत्स। ये सभी सुंदर हैं और कृष्ण-भक्ति से भरे हुए हैं।