Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

सङ्ग दोष शून्य दीक्षितादीक्षित

हरि हे! सङ्ग-दोष-शून्य, दीक्षितादीक्षित, जदि तव नाम गा’य मानसे आदर, कोरिबो ताहारे, जानि’ निज-जन ताय
अर्थ

हे हरि! यदि कुसंगति से मुक्त कोई व्यक्ति, दीक्षित हो या अदीक्षित, तेरा नाम गाए, तो मैं उसे अपने हृदय में आदर दूँगा, यह जानते हुए कि वह तेरा ही जन है।

दीक्षित होइया, भजे तुवा पद, ताहारे प्रनति कोरि अनन्य-भजने, विज्ञ येइ जन, ताहारे सेविबो, हरि!
अर्थ

जो दीक्षित होकर तेरे चरणों की सेवा करता है, उसे मैं प्रणाम करूँगा। जो अनन्य भजन में निपुण है, हे हरि, उसकी मैं सेवा करूँगा।

सर्व-भूते सम, ये भक्तेर मति, ताहार दर्शने मानि आपनाके धन्य, से सङ्ग पाइया, चरितार्थ होइलुँ जानि
अर्थ

जो भक्त सभी जीवों के प्रति समान भाव रखता है, उसकी कृपा-दृष्टि पाकर मैं स्वयं को धन्य मानता हूँ। उसकी संगति पाकर मैं अपने को कृतार्थ जानता हूँ।

निष्कपट-मति, वैष्णवेर प्रति, एइ धर्म कबे पा’बो कबे संसार- सिन्धु-पार हो’ये, तव ब्रज-पुरे जा’बो
अर्थ

वैष्णवों के प्रति यह निष्कपट भाव मुझे कब प्राप्त होगा? कब मैं इस संसार-सागर को पार करके तेरे व्रज-धाम में प्रवेश करूँगा?

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
4