Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

नीर धर्म गत जाह्नवी सलिले

हरि हे! नीर-धर्म-गत, जाह्नवी-सलिले, पङ्क-फेन दृष्ट होय तथापि कखोन, ब्रह्म-द्रव-धर्म, से सलिल ना छाडोय
अर्थ

हे हरि! गंगा के जल में कीचड़ और फेन दिखते हैं, जो जल में स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होते हैं। फिर भी गंगा का जल अपनी चिन्मय प्रकृति को कभी नहीं छोड़ता।

वैष्नव-शरीर, अप्राकृत सदा, स्वभाव-वपुर धर्मे कभु नाहे जड, तथापि ये निन्दे, पोडे से विषमाधर्मे
अर्थ

इसी प्रकार वैष्णव का शरीर सदा अप्राकृत है, प्रकृति के नियमों से परे है। यद्यपि किसी वैष्णव की जन्मजात प्रकृति या देह में दोष दिखाई दे, तो भी वैष्णव कभी भौतिक नहीं होता। जो कोई फिर भी वैष्णव की निंदा करता है, वह घोर पाप में गिरता है।

सेइ अपराधे, यमेर जातना, पाय जीव अविरत हे नन्द-नन्दन! सेइ अपराधे, येनो नाहि होइ हत
अर्थ

उस अपराध के कारण जीव निरंतर यमराज की यातना पाता है। हे नन्द-नन्दन! उस अपराध के कारण मैं कभी नष्ट न होऊँ।

तोमार वैष्णव, वैभव तोमार, आमारे कोरुना दोया तबे मोर गति, ह’बे तव प्रति, पा’बो तव पद-छाया
अर्थ

तेरे वैष्णव तेरा ही ऐश्वर्य हैं। वे मुझ पर कृपा करें, तो मेरी गति तेरी ओर होगी, और मैं तेरे चरणों की छाया पाऊँगा।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
4