Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

सङ्कीर्तने नित्यानन्द नाचे

सङ्कीर्तने नित्यानन्द नाचे प्रिय पारिषद-गण काछे
अर्थ

अपने प्रिय पार्षदों को पास लिए हुए भगवान नित्यानन्द संकीर्तन में नाचते हैं।

गोबिन्द माधब घोष गान शुनि केबा धरये पराण
अर्थ

गोविन्द और माधव घोष गाते हैं। उनके गीत सुनकर चकित हुए श्रोता अपनी साँस रोक लेते हैं।

पतितेर गलाय धरिया कान्दे पहुँ स-करुण हइया
अर्थ

पतित जीवों के गले में बाँहें डालकर दयालु भगवान नित्यानन्द रोते हैं।

गदगद कहे पतितेरे शुनि याहा पाषाण बिदरे
अर्थ

रुँधी हुई वाणी में वे पतित जीवों से बोलते हैं। उन्हें सुनकर पत्थर भी टूट जाते हैं।

तो सबार धरि बाहु धर धारा धारा प्रेमेर प्रसार
अर्थ

वे सबको कसकर गले लगाते हैं। उनकी आँखों से प्रेम के आँसुओं की धाराएँ बहती हैं।

तो सबार दुर्गति नाशिब ब्याजेर सहित प्रेम दिब
अर्थ

वे सबके भविष्य में जो भी अमंगल प्रतीक्षा कर रहा है, उसे नष्ट कर देते हैं। तरह-तरह के बहानों से वे लोगों को दिव्य प्रेम देते हैं।

यारे पाय चाय मुख-चान्दे गलाय धरिया तार कान्दे
अर्थ

जो कोई उनके चन्द्रमा जैसे मुख को देख लेता है, भगवान नित्यानन्द उसके गले पर अपनी बाँह रखकर रोने लगते हैं।

से हेन करुणा सोङरिया बासु घोष मरये बुझिया
अर्थ

भगवान नित्यानन्द की कृपा को याद करके वासुदेव घोष अभिभूत हो जाते हैं।

इस भजन के बारे में

राग
श्री राग
पद
8