Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

शरद चन्द पवन मन्द

शरद चन्द पबन मन्द बिपिने भरल कुसुम-गन्ध फुल्ल मल्लिका मालती यूथी मत्त मधुकर भोरनि
अर्थ

शरद का चंद्रमा चमक रहा है, मंद वायु बह रही है; वन पुष्पों की सुगंध से भरा है। चमेली, मालती तथा यूथिका के फूल खिले हैं, और उन पर मदमस्त भ्रमर मंडरा रहे हैं।

हेरत राति ऐछन भाति श्याम-मोहन मदन माति मुरली गान पञ्चम तान कुलबती-चित-चोरनि
अर्थ

रात्रि की ऐसी शोभा देखकर श्याम-मोहन प्रेम-मद में मतवाले हो जाते हैं। उनकी बाँसुरी का गीत पंचम स्वर में गूँजता है, सती नारियों के हृदय हर लेता है।

शुनत गोपी प्रेम रोपि मनहिं मनहिं आपन सोंपि तंहि चलत यंहि बोलत मुरलिक कल रोलनि
अर्थ

उसे सुनकर गोपियों का प्रेम जाग उठता है, और वे मौन ही अपने हृदय में स्वयं को समर्पित कर देती हैं; वे वहीं जाती हैं जहाँ वह पुकारे, बाँसुरी की मधुर, गूँजती स्वर-लहरी जहाँ ले जाए।

बिछुरि गेह निजहु देह एकु नयने काजर-रेह याहे रञ्जित एकु मञ्जीर एकु कुण्डल दोलनि
अर्थ

जल्दबाजी में घर और अपनी देह की सुध तक छोड़कर, कोई गोपी एक ही आँख में काजल लगाए चल पड़ती है, कोई केवल एक पायल पहने, कोई केवल एक कुंडल झुलाती हुई।

शिथिल छन्द नीबिक बन्ध बेगेते धा-ओत युबति-बृन्द खसत बसन रसन चोली गलित बेणी लोलनि
अर्थ

कमरबंद ढीले पड़े, वे युवतियाँ शीघ्रता से दौड़ पड़ती हैं; उनके वस्त्र सरक जाते हैं, करधनी और चोली खुल जाती है, और खुली हुई वेणियाँ व्याकुलता से लहराती हैं।

ततहिं बेलि सखिनी मेलि केहु काहुक पथ ना हेरि ऐछन मिलल गोकुल-चन्द गोबिन्द-दास बोलनि
अर्थ

वहाँ सब सखियाँ मिलकर एकत्र होती हैं, कोई किसी और की राह की परवाह नहीं करती; इस प्रकार वे गोकुल-चंद्र से मिलती हैं, ऐसा गोविन्द दास बताते हैं।

इस भजन के बारे में

पद
6