Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

सये किबा सेइ नयन चाहनि

सये किबा से-इ नयन चाहनि हासिर हिलोले मोरे पराण-पुतलि दोले दिते चा-इ यौबन निछनि
अर्थ

अहा, उन नेत्रों की कैसी दृष्टि है! उनकी मुस्कान की एक झलक मात्र से मेरे जीवन की गुड़िया काँप उठती है, और मैं अपना यौवन उन पर न्योछावर कर देना चाहती हूँ।

भाले से चन्दन चान्द कामिनी मोहन फान्द आन्धारे करियाछे आला मेघेर उपर किबा सदा-इ उदय करे निशि दिशि शशी षोल-कला
अर्थ

उनके ललाट पर चंदन का चन्द्रमा स्त्रियों के मन को मोह लेने वाला फंदा है; उसने अंधेरे में उजाला कर दिया है। मानो काले बादल के ऊपर सोलहों कलाओं वाला पूर्ण चंद्रमा हर रात, हर दिशा में सदा उदित होता रहे।

किबा से चूड़ार ठाट दश नख चान्द नाट अपरूप बंशी बाज-इते हेर-इते से-इ मुख मने हय यत सुख जिते कि पारिये पासरिते
अर्थ

उनकी शिखा की कैसी शोभा है! अनुपम बाँसुरी बजाते समय उनके दसों चन्द्र-से नख नाचते हैं। उस मुख को देखकर मन में जो आनंद भर जाता है, उसे जीते-जी मैं कैसे भूल सकती हूँ?

कुल शील यत छिल मने लागे सब गेल देखिया बारेक से-इ रूप गोबिन्द-दासेर चिते ऐछन मागये गो नब अनुरागेर स्वरूप
अर्थ

जो कुल-मर्यादा और लज्जा मुझे कभी प्रिय थी, वह उस सौंदर्य को एक बार देख लेने भर से ही सब लुप्त हो गई। इस प्रकार गोविन्द दास के हृदय में यही अभिलाषा है: नित्य-नवीन प्रेम का वह साक्षात् स्वरूप।

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पद
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