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“जय राधा माधव” के परिणाम

536 भजन · 902 पद भजन के शब्दों में

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4 पद भजन में 3

जयदेव गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    हे गोविन्द हे गोपाल
    केशव माधव दीन-दोयाल्
  • पद 2भजन
    तुमि परम दोयाल् प्रभु, परम दोयाल्
    केशव माधव दीन दोयाल्
इस भजन में 2 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    पीत-बसन परि मयूरेर शिख धोरि
    मूरलीर् वाणी-तुले बोले राधा-नाम्
  • पद 4भजन
    तुमि मदेर गोपाल् प्रभु, मदेर गोपाल्
    केशव माधव दीन-दोयाल्
3 पद भजन में

राधामोहन · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य दया-सिन्धु
    पतित उद्धार हेतु जय दीन-बन्धु
  • पद 2भजन
    जय प्रेम-भक्ति-दाता दया कर मोरे
    दन्ते तृण करि डाके ए दास पामरे
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 6भजन
    बिशेष प्रतिज्णा शुनि ए-इ कलि-युगे
    ए-इ भरसाय राधामोहन पापी मागे
2 पद भजन में

राधामोहन · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य नाम-सार
    अपरूप कलप बिरिख अबतार
  • पद 4भजन
    हेन प्रभु न सेबिले कोन काज नय
    ए राधामोहन मागे चरणे आश्रय
12 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय जय गुरु गोसाञी-श्री-चरण सार
    याहा हैते हब पार ए भब-संसार
  • पद 3भजन
    जय रूप सनातन भट्ट रघुनाथ
    श्री-जीब गोपाल भट्ट दास रघुनाथ
इस भजन में 10 और मिलान दिखाएँ
  • पद 4भजन
    जय ए-इ छय गोसाञीर करुम चरण बन्दन
    याहा हैते बिघ्न नाश अभीष्ट पूरण
  • पद 5भजन
    जय रस-नागरी जय नन्द-लाल
    जय जय मदन-मोहन श्री-गोपाल
  • पद 6भजन
    जय शची-सुत गौराङ्ग-सुन्दर
    जय नित्यानन्द पद्माबतीर कोँअर
  • पद 7भजन
    जय जय सीता-नाथ अद्वैत गोसाञी
    याहार करुणा-बले गोरा-गुण गा-इ
  • पद 8भजन
    जय जय श्रीबास जय गदाधर
    जय स्वरूप रामानन्द प्रेमेर सागर
  • पद 9भजन
    जय जय सनातन जय श्री-रूप
    जय जय रघुनाथ प्राणेर स्वरूप
  • पद 10भजन
    जय गौर-भक्त-बृन्द दया कर मोरे
    सबार चरण-धूलि धरि निज शिरे
  • पद 11भजन
    जय जय नीलाचल-चन्द्र जगन्नाथ
    मो पापिरे दया करि कर आत्म-साथ
  • पद 12भजन
    जय जय गोपाल देब भकत-बत्सल
    नब घन जिनि तनु परम उज्ज्वल
  • पद 13भजन
    जय जय गोपीनाथ प्रभु प्राण मोर
    पुरी गोसाञीर लागि यार नाम क्षीर-चोर
12 पद भजन में 9

जयदेव गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
    विहित-वहित्र-चरित्रम् अखेदम्
    केशव धृत-मीन-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 2भजन
    क्षितिर् इह विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे
    धरणि-धरण-किण-चक्र-गरिष्ठे
    केशव धृत-कूर्म-शरीर जय जगदीश हरे
इस भजन में 10 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    वसति दशन-शिखरे धरणी तव लग्ना
    शशिनि कलङ्क-कलेव निमग्ना
    केशव धृत-शूकर-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 4भजन
    तव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गं
    दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम्
    केशव धृत-नरहरि-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 5भजन
    छलयसि विक्रमणे बलिम् अद्भुत-वामन
    पद-नख-नीर-जनित-जन-पावन
    केशव धृत-वामन-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 6भजन
    क्षत्रिय-रुधिर-मये जगद्-अपगत-पापम्
    स्नपयसि पयसि शमित-भव-तापम्
    केशव धृत-भृगुपति-रूप जय जगदिश हरे
  • पद 7भजन
    वितरसि दिक्षु रणे दिक्-पति-कमनीयं
    दश-मुख-मौलि-बलिम् रमणीयम्
    केशव धृत-राम-शरीर जय जगदिश हरे
  • पद 8भजन
    वहसि वपुषि विशदे वसनं जलदाभं
    हल-हति-भीति-मिलित-यमुनाभम्
    केशव धृत-हलधर-रूप जय जगदिश हरे
  • पद 9भजन
    निन्दासी यज्ञ-विधेर् अहह श्रुति-जातं
    सदय-हृदय दर्शित-पशु-घातम्
    केशव धृत-बुद्ध-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 10भजन
    म्लेच्छ-निवह-निधने कलयसि करवालं
    धूमकेतुम् इव किम् अपि करालम्
    केशव धृत-कल्कि-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 11भजन
    श्री-जयेदेव-कवेर् इदम् उदितम् उदारं
    शृणु सुख-दं शुभ-दं भव-सारम्
    केशव धृत-दश-विध-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 12भजन
    वेदान् उद्धरते जगन्ति वहते भू-गोलम् उद्बिभ्रते
    दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्र-क्षयं कुर्वते
    पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यम् आतन्वते
    म्लेच्छान् मूर्छयते दशकृति-कृते कृष्णाय तुभ्यं नमः
10 पद भजन में

कृष्ण द्वैपायन व्यास

  • पद 1भजन
    गृहे राधा वने राधा राधा पृष्ठे पुरः स्थिता
    यत्र यत्र स्थिता राधा राधैवाराध्यते मया
  • पद 2भजन
    जिह्वा राधा श्रुतौ राधा राधा नेत्रे हृदि स्थिता
    सर्वाङ्ग-व्यापिनी राधा राधैवाराध्यते मया
इस भजन में 8 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    पूजा राधा जपो राधा राधिका चाभिवन्दने
    स्मृतौ राधा शिरो राधा राधैवाराध्यते मया
  • पद 4भजन
    गाने राधा गुणे राधा राधिका भोजने गतौ
    रत्रौ राधा दिवा राधा राधैवाराध्यते मया
  • पद 5भजन
    माधुर्ये मधुरा राधा महत्त्वे राधिका गुरुः
    सौन्दर्ये सुन्दरी राधा राधैवाराध्यते मया
  • पद 6भजन
    राधा रस-सुधा-सिन्धु राधा सौभाग्य-मञ्जरी
    राधा व्रजाङ्गना-मुख्या राधैवाराध्यते मया
  • पद 7भजन
    राधा पद्मानना पद्मा पद्मोद्भव-सुपूजिता
    पद्मे विवेचिता राधा राधैवाराध्यते मया
  • पद 8भजन
    राधा कृष्णात्मिका नित्यं कृष्णो राधात्मको ध्रुवम्
    वृन्दावनेश्वरी राधा राधैवाराध्यते मया
  • पद 10भजन
    कृष्णेन पठितं स्तोत्रं राधिका-प्रीतये परम्
    यः पठेत् प्रयतो नित्यं राधा-कृष्णान्तिगो भवेत्
  • पद 11भजन
    आराधित-मनाः कृष्णो राधाराधित-मानसः
    कृष्णाकृष्त-मना राधा राधा-कृष्णेति यः पठेत्
12 पद भजन में

जयदेव गोस्वामी

  • पद 1भजन
    प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं विहित-वहित्र-चरित्रम् अखेदम्
    केशव धृत-मीन-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 2भजन
    क्षितिर् इह विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे
    धरणि-धरण-किण-चक्र-गरिष्ठे
    केशव धृत-कूर्म-शरीर जय जगदीश हरे
इस भजन में 10 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    वसति दशन-शिखरे धरणी तव लग्ना
    शशिनि कलङ्क-कलेव निमग्ना
    केशव धृत-शूकर-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 4भजन
    तव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गं
    दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम्
    केशव धृत-नरहरि-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 5भजन
    छलयसि विक्रमणे बलिम् अद्भुत-वामन
    पद-नख-नीर-जनित-जन-पावन
    केशव धृत-वामन-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 6भजन
    क्षत्रिय-रुधिर-मये जगद्-अपगत-पापं
    स्नपयसि पयसि शमित-भव-तापम्
    केशव धृत-भृगुपति-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 7भजन
    वितरसि दिक्षु रणे दिक्-पति-कमनीयं
    दश-मुख-मौलि-बलिं रमणीयम्
    केशव धृत-राम-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 8भजन
    वहसि वपुषि विशदे वसनं जलदाभं
    हल-हति-भीति-मिलित-यमुनाभम्
    केशव धृत-हलधर-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 9भजन
    निन्दसि यज्ञ-विधेर् अहह श्रुति-जातं
    सदय-हृदय दर्शित-पशु-घातम्
    केशव धृत-बुद्ध-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 10भजन
    म्लेच्छ-निवह-निधने कलयसि करवालं
    धूमकेतुम् इव किम् अपि करालम्
    केशव धृत-कल्कि-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 11भजन
    श्री-जयदेव-कवेर् इदम् उदितम् उदारं
    शृणु सुख-दं शुभ-दं भव-सारम्
    केशव धृत-दश-विध-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 12भजन
    वेदान् उद्धरते जगन्ति वहते भू-गोलम् उद्बिभ्रते
    दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्र-क्षयं कुर्वते
    पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यम् आतन्वते
    म्लेच्छान् मूर्छयते दशाकृति-कृते कृष्णाय तुभ्यं नमः
2 पद भजन में

गोविन्द दास कविराज

  • पद 3भजन
    सनातन रूप कृत, ग्रन्थ भागवत,
    अनुदिन कोरोतो विचार
    राधा माधव, युगल उज्ज्वल रस,
    परमानन्द सुख सार
  • पद 1भजन
    जय रे जय रे जय, ठाकुर नरोत्तम,
    प्रेम भकति महाराज
    याकर मन्त्री, अभिन्न कलेवर,
    रामचन्द्र कविराज
8 पद भजन में 6

जीव गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    कृष्ण-प्रेम-मयी राधा
    राधा प्रेम-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 2भजन
    कृष्णस्य द्रविनं राधा
    राधाया द्रविनं हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    कृष्ण-प्राण-मयी राधा
    राधा-प्राण-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 4भजन
    कृष्ण-द्रव-मयी राधा
    राधा-द्रव-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 5भजन
    कृष्ण-गेहे स्थिता राधा
    राधा-गेहे स्थितो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 6भजन
    कृष्ण-चित्त-स्थिता राधा
    राधा-चित्त-स्थितो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 7भजन
    नीलाम्बर-धरा राधा
    पीताम्बर-धरो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 8भजन
    वृन्दावनेश्वरी राधा
    कृष्णो वृन्दावनेश्वरः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
9 पद भजन में 2

जयदेव गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    श्रित-कमला-कुच-मण्डल (हे)
    धृत-कुण्डल (ए)
    कलित-ललित-वन-माला
    जय जय देव हरे
  • पद 2भजन
    दिन-मणि-मण्डल-मण्डन (हे)
    भव-खण्डन (ए)
    मुनि-जन-मानस-हंस
    जय जय देव हरे
इस भजन में 7 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    कालिय-विषधर-गञ्जन (हे)
    जन-रञ्जन (ए)
    यदु-कुल-नलिन-दिनेश
    जय जय देव हरे
  • पद 4भजन
    मधु-मुर-नरक-विनाशन (हे)
    गरुडासन (ए)
    सुर-कुल-केलि-निदान
    जय जय देव हरे
  • पद 5भजन
    अमल-कमल-दल-लोचन (हे)
    भव-मोचन (ए)
    त्रिभुवन-भुवन-निधान
    जय जय देव हरे
  • पद 6भजन
    जनक-सुता-कृत-भूषण (हे)
    जित-दूषण (ए)
    समर-शमित-दश-कण्ठ
    जय जय देव हरे
  • पद 7भजन
    अभिनव-जलधर-सुन्दर (हे)
    धृत-मन्दर (ए)
    श्री-मुख-चन्द्र-चकोर
    जय जय देव हरे
  • पद 8भजन
    तव चरणं प्रणत वयम् (हे)
    इति भावय (ए)
    कुरु कुशलम् प्रणतेषु
    जय जय देव हरे
  • पद 9भजन
    श्री-जयदेव-कवेर् इदं (हे)
    कुरुते मुदम् (ए)
    मङ्गलम् उज्ज्वल-गीतं
    जय जय देव हरे