- पद 1भजन(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी
(जय) गोपी-जन-वल्लभ (जय) गिरि-वर-धारी
(जय) जशोदा-नन्दन, (जय) ब्रज-जन-रञ्जन,
(जय) जामुन-तीर-वन-चारी
“जय राधा माधव” के परिणाम
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1 पद भजन में
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- पद 1भजनजय राधा-माधव राधा-माधव राधे
(जयदेवेर प्राण-धन हे)
1 पद भजन में
- पद 1भजन(जय) राधा-वल्लभ, (जय) राधा-विनोद
(जय) राधा-माधव, (जय) राधा-प्रमोद
1 पद भजन में
- पद 6भजन…वञ्चित गोविन्द दास
(1)-(2) “ठाकुर नरोत्तम की जय हो, जय हो, जो प्रेम-भक्ति के महाराज हैं, जिनके मन्त्री रामचन्द्र कविराज थे, जो उनसे अभिन्न थे! उनका प्रेम उनके शरीर पर प्रकट सभी भाव-रूपी आभूषणों का मुकुट-मणि था। वे अपने भक्तों के समाज के साथ खेतुरि राज्य के सिंहासन पर विराजते थे।”
(3)-(4) “वे प्रतिदिन श्री सनातन और रूप गोस्वामी द्वारा रचित भक्ति-ग्रन्थों का विचार करते थे, जिनमें श्री राधा और माधव का उज्ज्वल शृङ्गार-रस है और जो परम आनन्द का सार हैं। श्री सङ्कीर्तन के आनन्द में वे नहीं जानते थे कि क्या धर्म है और क्या अधर्म। योग, दान, व्रत आदि पुण्य-कर्म दूर भाग गए, और सकाम कर्म तथा अद्वैत-ज्ञान रोते रह गए।”
(5)-(6) “उन्होंने भक्ति-धन देने वाले शास्त्रों का गौरव बढ़ाया, और उनका प्रताप देखकर साङ्ख्य, मीमांसक, तर्क आदि सब दर्शन काँप उठे। चोर-जैसे अभक्त दूर भाग गए, उनके निकट वे अपना प्रकाश न दिखा सके। उन्होंने दीन-हीन जनों को भक्ति-धन दिया, और गोविन्द दास उसी धन के लिए लालायित है।”
1 पद भजन में
- पद 2भजनजय राधा-माधव कुञ्ज-बिहारी
गोपी-जन-वल्लभ गिरि-वर-धारी
यशोदा-नन्दन ब्रज-जन-रञ्जन
यमुना-तीर-वन-चारी
3 पद भजन में
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- पद 2भजननृहरि माधव-बंशे, अक्षोभ्य परमहंसे,
शिष्य बोलि' अङ्गीकार कोरे
अक्षोभ्येर शिष्य जय-तीर्थ नामे परिचय,
तार दास्ये ज्ञानसिन्धु तोरे - पद 4भजनजयधर्म-दास्ये ख्याति, श्री पुरुषोत्तम-जति,
ता ह'ते ब्रह्मण्य-तीर्थ सूरि
व्यासतीर्थ तार दास, लक्ष्मीपति व्यास-दास,
ताहा ह'ते माधवेन्द्र पुरी
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- पद 6भजनमहाप्रभु श्री-चैतन्य, राधा-कृष्ण नहे अन्य,
रूपानुग जनेर जीवन
विश्वम्भर प्रियङ्कर, श्री-स्वरूप दामोदर,
श्री-गोस्वामी रूप-सनातन
4 पद भजन में
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2 पद भजन में