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“जय राधा माधव” के परिणाम

14 भजन · 14 पद भजन के शब्दों में

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1 पद भजन में

गोविन्द दास कविराज

  • पद 6भजन
    …वञ्चित गोविन्द दास
    (1)-(2) “ठाकुर नरोत्तम की जय हो, जय हो, जो प्रेम-भक्ति के महाराज हैं, जिनके मन्त्री रामचन्द्र कविराज थे, जो उनसे अभिन्न थे! उनका प्रेम उनके शरीर पर प्रकट सभी भाव-रूपी आभूषणों का मुकुट-मणि था। वे अपने भक्तों के समाज के साथ खेतुरि राज्य के सिंहासन पर विराजते थे।”
    (3)-(4) “वे प्रतिदिन श्री सनातन और रूप गोस्वामी द्वारा रचित भक्ति-ग्रन्थों का विचार करते थे, जिनमें श्री राधा और माधव का उज्ज्वल शृङ्गार-रस है और जो परम आनन्द का सार हैं। श्री सङ्कीर्तन के आनन्द में वे नहीं जानते थे कि क्या धर्म है और क्या अधर्म। योग, दान, व्रत आदि पुण्य-कर्म दूर भाग गए, और सकाम कर्म तथा अद्वैत-ज्ञान रोते रह गए।”
    (5)-(6) “उन्होंने भक्ति-धन देने वाले शास्त्रों का गौरव बढ़ाया, और उनका प्रताप देखकर साङ्ख्य, मीमांसक, तर्क आदि सब दर्शन काँप उठे। चोर-जैसे अभक्त दूर भाग गए, उनके निकट वे अपना प्रकाश न दिखा सके। उन्होंने दीन-हीन जनों को भक्ति-धन दिया, और गोविन्द दास उसी धन के लिए लालायित है।”
3 पद भजन में 6

भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 2भजन
    नृहरि माधव-बंशे, अक्षोभ्य परमहंसे,
    शिष्य बोलि' अङ्गीकार कोरे
    अक्षोभ्येर शिष्य जय-तीर्थ नामे परिचय,
    तार दास्ये ज्ञानसिन्धु तोरे
  • पद 4भजन
    जयधर्म-दास्ये ख्याति, श्री पुरुषोत्तम-जति,
    ता ह'ते ब्रह्मण्य-तीर्थ सूरि
    व्यासतीर्थ तार दास, लक्ष्मीपति व्यास-दास,
    ताहा ह'ते माधवेन्द्र पुरी
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  • पद 6भजन
    महाप्रभु श्री-चैतन्य, राधा-कृष्ण नहे अन्य,
    रूपानुग जनेर जीवन
    विश्वम्भर प्रियङ्कर, श्री-स्वरूप दामोदर,
    श्री-गोस्वामी रूप-सनातन
4 पद भजन में 2

बिल्वमंगल ठाकुर

  • पद 23भजन
    वृन्दावने गोप-गणाश् च गोप्यो
    विलोक्य गोविन्द-वियोग-खिन्नम्
    राधां जगुः साश्रु-विलोचनाभ्यां
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 31भजन
    अक्रूरम् आसाद्य यदा मुकुन्दश्
    चापोत्सवार्थं मथुरां प्रविष्टः
    तदा स पौरैर् जयतीत्य् अभाсइ
    गोविन्द दामोदर माधवेति
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  • पद 39भजन
    सा नीरजाक्षीम् अवलोक्य राधां
    रुरोद गोविन्द-वियोग-खिन्नाम्
    सखी प्रफुल्लोत्पल-लोचनाभ्यां
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 58भजन
    श्री कृष्ण राधावर गोकुलेश
    गोपाल गोवर्धन-नाथ विष्णो
    जिह्वे पिबस्वामृतम् एतद् एव
    गोविन्द दामोदर माधवेति
2 पद भजन में

रूप गोस्वामी

  • पद 43भजन
    चुम्बा-वेणु-ग्लह-द्यूति-जयि-राधा-धृताञ्चलः
    राधा-प्रेम-रसावर्त-विभ्रम-भ्रमितान्तरः
  • पद 26भजन
    चन्द्रावली-चकोरेन्द्रो राधिका-माधवी-मधुः
    ललिता-केलि-ललितो विशाखोडु-निशाकरः