“जय राधा माधव” के परिणाम
536 भजन · 902 पद भजन के शब्दों में · 608 पद अर्थ में
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- पद 1भजनमाधव, बहुत मिनति करि तोय
देइ तुलसी तिल, देह समर्पिनु,
दया जानि ना छाडबि मोय
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- पद 1भजनजय गोद्रुम-पति गोरा
निताइ-जीबन अद्वैतेर धन
बृन्दाबन-भाब-बिभोर
गदाधर-प्राण श्रीबास-शरण … - पद 1अर्थजय हो चैतन्य महाप्रभु की, जो गोद्रुम के स्वामी (गोद्रुम-पति) हैं, गौरवर्ण (गोरा) हैं, नित्यानन्द के जीवन (नित्यानन्द-जीवन) हैं, अद्वैत के धन (अद्वैत-धन) हैं, वृन्दावन के प्रेम-भाव से अभिभूत (वृन्दावन-भाव-विभोर) हैं, गदाधर के प्राण (गदाधर-प्राण) हैं, श्रीवास…
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- पद 1भजनजय जय पद्माबती-सुत सुन्दर
नित्यानन्द गुण-भूप
जग-जन नयन ताप भर भञ्जन
जिनि कणा कारुण अपरूप रूप - पद 1अर्थजय जय भगवान नित्यानन्द की! वे पद्मावती के पुत्र हैं। वे सुंदर और सुडौल हैं। वे गुणों के राजा हैं। वे संसार के लोगों की आँखों की जलती पीड़ाओं को दूर करते हैं। उनका अद्भुत रूप कणा कारुण को भी फीका कर देता है।
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