Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री रूप गोसाइ श्री गुरु रूपेते

हरि हे! श्री-रूप-गोसाइ, श्री-गुरु-रूपेते, शिक्षा दिल मोर काने “जानो मोर कथा, नामेर काङ्गाल! रति पा’बे नाम-गाने
अर्थ

हे हरि! श्री रूप गोस्वामी ने श्री गुरु के रूप में मेरे कानों में यह शिक्षा दी, 'हे नाम के कंगाल! मेरी बात समझ, तो नाम-कीर्तन में तुझे रति प्राप्त होगी।'

कृष्ण-नाम-रूप- गुन-सुचरित, परम जतने कोरि’ रसना-मानसे, कोरहो नियोग, क्रम-विधि अनुसरि’
अर्थ

'बड़े यत्न से, क्रम-विधि का पालन करते हुए, अपनी जिह्वा और मन को कृष्ण के नाम, रूप, गुण और लीलाओं के कीर्तन और स्मरण में लगा।'

ब्रजे कोरि’ बास, रागानुगा होइया, स्मरण कीर्तन कोरो ए निखिल काल, कोरहो जापन, उपदेश-सार धरो’ ”
अर्थ

'व्रज में निवास कर, रागानुगा बन, और स्मरण-कीर्तन में लगा रह। अपना सारा समय इस प्रकार बिता, और इसी को समस्त उपदेशों का सार मानकर धारण कर।'

हा! रूप-गोसाइ, दोया कोरि’ कबे, दिबे दिने ब्रज-बास रागात्मिक तुमि, तव पदानुग, होइते दासेर आशा
अर्थ

हा रूप गोस्वामी! आप कृपा करके इस दीन कंगाल को व्रज-वास कब देंगे? आप रागात्मिक भक्त हैं; आपके चरणों का अनुगामी बनना ही इस दास की आशा है।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
4