Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री उज्ज्वल रस सार स्वभाबतः द्वि प्रकार

श्री उज्ज्वल रस सार स्वभाबतः द्वि-प्रकार बिप्रलम्भ सम्भोग आख्यान बिना बिप्रलम्भाश्रोय सम्भोगेर पुष्टि नोय ताइ बिप्रलम्भेर बिधान
अर्थ

उज्ज्वल-रस, जो समस्त रसों में सर्वश्रेष्ठ है, स्वभाव से दो प्रकार का है: विप्रलम्भ और सम्भोग। वियोग के बिना मिलन का सुख पूर्ण रूप से अनुभव नहीं होता। यही विप्रलम्भ का प्रयोजन है।

पूर्ब-राग तथा मान प्रबास बैच्त्त्य-ज्ञान बिप्रलम्भ चारि तो' प्रकार सङ्गमेर पूर्ब-रीति लभे पूर्ब-राग ख्याति दर्शने श्रबणे जन्म तार
अर्थ

विप्रलम्भ चार प्रकार का है: पूर्वराग, मान, प्रवास और वैचित्त्य-ज्ञान। पूर्वराग वह प्रेम है जो प्रियतम से साक्षात् मिलने से पहले उन्हें देखने या उनके विषय में सुनने से उत्पन्न होता है।

अनुरक्त दम्-पतिर अभिष्ट बिश्लेष स्थिर दर्शन बिरोधि भाब मान स-हेतु निर्हेतु मान प्रणयेर परिणाम प्रणयेर बिलासप्रमाण
अर्थ

मान में दोनों प्रेमी स्वेच्छा से एक-दूसरे से दूर रहते हैं और एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते। यह मान किसी कारण से अथवा बिना कारण भी हो सकता है। मान में प्रकट होने वाला यह रोष वास्तव में प्रेम का ही एक रूप है। ये सब प्रेम की ही लीलाएँ हैं।

साम-भेद क्रिया दाने नत्युपेखा सु-बिधाने सहेतु मानेर उपशम देश काल बेणु-रबे निर्हेतुक मानोत्सबे कोरे अति शीघ्र उपरम
अर्थ

सहेतुक मान मधुर वचनों, हास-परिहास, पूजा, उपहार, चरण-वन्दन अथवा उदासीनता दिखाने से शान्त हो जाता है। निर्हेतुक मान सुन्दर स्थान, समय बीतने अथवा बाँसुरी की ध्वनि सुनकर बहुत शीघ्र शान्त हो जाता है।

बिच्छेद आशङ्का होइते प्रेमेर बैचित्त्य चित्ते प्रेमेर स्वभाबे उपजोय देश ग्राम बनान्तरे प्रिया जे प्रबास कोरे प्रबासाख्य बिप्रलम्भ होय
अर्थ

प्रियतम से बिछुड़ने की आशंका से हृदय में प्रेम-वैचित्त्य उत्पन्न होता है। जब प्रियतम किसी दूसरे देश, गाँव या वन में चले जाते हैं, तो उस वियोग को प्रवास कहा जाता है।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
5