Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्रीबास बनिता अति सु चरित स्नेहेर मूरति येन

श्रीबास-बनिता अति सु-चरित स्नेहेर मूरति येन सतत लज्जित सती पतिव्रता जगत नाहिक हेन
अर्थ

इस संसार में श्रीवास की पत्नी जैसी कोई पतिव्रता सती स्त्री नहीं है। वे सदा लज्जाशील और सच्चरित्र हैं, और दिव्य प्रेम की साकार मूर्ति जैसी हैं।

प्रफुल्लित तनु अनुपम आध बसन झापिया मुखे सीताय समीपे दाण्डा-इया घन निरिखे मनेर सुखे
अर्थ

उनका अनुपम शरीर प्रसन्नता से खिल उठा है। उनका मुख वस्त्र से आधा ढका हुआ है। सीता के पास खड़ी होकर वे उस छोटे बालक को निहारती हैं जो उनके हृदय को आनन्द देता है।

आङ्गिनार माझे प्रिय परिकर बेष्टित बसिया गोरा सुन्दर बदन-चान्द झलकये ग-खानि सोँ\आर पारा
अर्थ

अपने प्रिय साथियों से घिरे बालक गौर आँगन में खड़े हैं। उनके मुख का सुन्दर चन्द्रमा चमक रहा है। उनके अंग सोने की तरह दमक रहे हैं।

नब नब सब कि कब माल्यानि से शोभा सायरे भासे अपरूप प्रेम-बाला-इ ल-इया मरु नरहरि दासे
अर्थ

वे नये-नये फूलों की मालाओं से सजे हैं। वे शोभा के सागर में तैर रहे हैं। नरहरि दास पर उनके प्रति अद्भुत प्रेम की एक बड़ी विपत्ति टूट पड़ी है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4