Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

अगतम् इव हरिम् अचिरम्

अगतम् इव हरिम् अचिरम् कलयत सुहृदं दयय यद् असौ नगम् अपि दध्रे सु-चिरम्
अर्थ

देखो! अपने मित्रों पर दया करके कृष्ण यहाँ आ गए हैं! उन्होंने गोवर्धन पर्वत को बहुत समय तक उठाए रखा होगा।

कुन्द-स्रग्-अवित-कौतुक-वेशं गो-गोपैर् विहरन्तम् मृदु-मृदु-मरुद्-अनु-वीजितम् अनु-लवम् अखिल-मनंसि हरन्तम्
अर्थ

वे कुन्द के फूलों की माला और अद्भुत वस्त्र-आभूषण पहने हैं। वे सुरभि गायों और गोपों के साथ दिव्य लीलाएँ करते हैं। अत्यन्त मन्द वायु क्षण भर उन्हें पंखा झलती है। वे सबके हृदय हर लेते हैं।

सुर-वन्दिभिर् अभिवन्दितम् अवहित-तत्-कृत-नर्तन-वद्यम् मुनि-समुदय-नुति-गुनितम् गुनित-निपुनं जगद्-अभिवद्यम्
अर्थ

देवताओं के कवि-गायक उनके सामने गाते, नाचते और प्रणाम करते हैं। मुनि अनेक स्तुतियों से उनकी महिमा गाते हैं। वे सभी दिव्य गुणों से सम्पन्न हैं। सारा संसार उनकी पूजा करता है।

अथ गो-धन-गणम् अनु समम् अनुगैस् तद्-वर्णित-गरिमणम् श्रम-कन्तिभिर् अपि सुख-करिणम् इत-वेणु-कल-वरिमणम्
अर्थ

वे और उनके गोप-सखा सुरभि गायों के पीछे-पीछे चलते हैं। गोप उनकी महिमा का बखान करते हैं। थकान की कान्ति उन्हें आनन्ददायक रूप से सुन्दर बना देती है। बाँसुरी बजाने में वे सबसे कुशल हैं।

खुर-रेणु-प्लुत-मल्य-मनोहरम् ईषद्-घुर्णित-नयनम् एतं पश्यत निज-जन-मनदम् ईप्सित-गव्यनयनम्
अर्थ

देखो! गायों के खुरों की धूल से ढकी माला पहने हुए वे बहुत सुन्दर लग रहे हैं। उनकी आँखें थोड़ी-सी घूम रही हैं। वे अपने सखाओं की प्रशंसा करते हैं। वे सुरभि गायों को घर ले आने के लिए उत्सुक हैं।

कुन्डल-लक्ष्मी-भृत-पण्डु-द्युति-गण्डं गज-पति खेलम् क्षणदपति-वत् प्रमुदितम् उदितम् प्रग् अधि-सन्ध्य-वेलम्
अर्थ

चमकते सुनहरे कुण्डल उनके कपोलों को आलोकित करते हैं। वे राजसी हाथी की तरह क्रीड़ा करते हैं। वे पूर्वी क्षितिज पर आनन्द से उदित होते चन्द्रमा जैसे हैं।

इस भजन के बारे में

पद
6