अवधर्य सखि तव सखि वृत्तम्
हे सखी, ज़रा विचार कीजिए: आपके सखा कृष्ण के कार्यों ने उनके वियोग में पड़े हुए लोगों के हृदयों को निर्दयता से चीर डाला है।
कृष्ण का बायाँ हाथ उनके बायें गाल पर टिका है, उनकी शोभायमान भौंहें सुन्दरता से हिल रही हैं, वे अपने मृदु मुस्कुराते मुख पर तेजस्वी बाँसुरी रखे हैं, और अपनी कोमल उँगलियाँ बाँसुरी पर खेल-खेल में चला रहे हैं।
कृष्ण कुशलता से ऐसा मधुर, रहस्यमय संगीत बजाते हैं, जो पृथ्वी के सभी निवासियों को विह्वल कर देता है और अन्तरिक्ष में अपने विमानों में यात्रा करते देवताओं और देवियों को मोहित कर देता है।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- जीव गोस्वामी · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- गोपाल-चम्पू
- पद
- 3