Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

अवधर्य सखि तव सखि वृत्तम्

टेक
अवधर्य सखि तव सखि-वृत्तम् विरहि-जननं जनयति हृदयं विदयतय बत कृत्तम्
अर्थ

हे सखी, ज़रा विचार कीजिए: आपके सखा कृष्ण के कार्यों ने उनके वियोग में पड़े हुए लोगों के हृदयों को निर्दयता से चीर डाला है।

वम-भुजकृत-वम-कपोलकम् उल्लल-चिल्ली-भसम् कुमरङ्गुलि-विलसितम् उज्ज्वल-वेणु-मुखं मृदु-हसम्
अर्थ

कृष्ण का बायाँ हाथ उनके बायें गाल पर टिका है, उनकी शोभायमान भौंहें सुन्दरता से हिल रही हैं, वे अपने मृदु मुस्कुराते मुख पर तेजस्वी बाँसुरी रखे हैं, और अपनी कोमल उँगलियाँ बाँसुरी पर खेल-खेल में चला रहे हैं।

रग-कलकुलितखिल-भुचर-गन-कलैर् अनुविद्धम् व्योमग-यन-जनी-जन-मोहनम् अनुगमितखिल-सिद्धम्
अर्थ

कृष्ण कुशलता से ऐसा मधुर, रहस्यमय संगीत बजाते हैं, जो पृथ्वी के सभी निवासियों को विह्वल कर देता है और अन्तरिक्ष में अपने विमानों में यात्रा करते देवताओं और देवियों को मोहित कर देता है।

इस भजन के बारे में

पद
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