कि आनन्द नदीया नगरे
नदिया नगर में यह कैसा आनन्द छाया हुआ है? निमाई के विवाह का समाचार घर-घर पहुँच रहा है।
नदिया के स्त्री-पुरुषों को क्या हो गया है? निमाई का विवाह देखने की इच्छा से सबके हृदय उमड़ पड़े हैं।
भाट कवि दौड़ रहे हैं। वे मन में सोचते हैं कि उन्हें अनमोल निधि मिलेगी।
नर्तक, वादक और दूसरे कलाकार भी दौड़ रहे हैं। उनके मन में न जाने कितनी इच्छाएँ भरी हैं।
ज्योतिषी भी दौड़ रहे हैं। विवाह के लिए उनके पास एक अद्भुत शुभ लग्न है।
माली आनन्द से दौड़ रहे हैं। वे तरह-तरह के फूलों के हार लेकर शची के घर आ रहे हैं।
केवल एक मुख वाला कौन व्यक्ति इन सब लीलाओं का वर्णन करने की शक्ति रखता है? इनका वर्णन करने के लिए कितने मुख पर्याप्त होंगे? सैकड़ों-सैकड़ों निर्धन याचक घर पर आ रहे हैं।
नरहरि के मन में यह इच्छा बनी रहती है: काश, अपनी दोनों आँखें भरकर मैं किसी दिन भगवान् निमाई के विवाह की लीलाएँ देख पाऊँ।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरहरि दास
- पद
- 8