Vaishnava Songs
अध्याय

स पार्षद भगवद् विरह जनित विलाप — भगवान और उनके पार्षदों के विरह में रचयिता का विलाप

प्रार्थना (नरोत्तम दास ठाकुर) से।

भगवान और उनके पार्षदों के विरह से उठे विलाप का एक भजन। यहाँ फिर विरह, यानी बिछड़ना, ही मुख्य भाव है, जैसा पहले स विलाप श्री वृन्दावन वास लालसा में था। पर यहाँ यह किसी स्थान के लिए नहीं, बल्कि स्वयं भगवान के पार्षदों के लिए है।

1 भजन