धन मोर नित्यानन्द
धन मोर नित्यानन्द पति मोर गौरचन्द्र
प्रार्थना (नरोत्तम दास ठाकुर) से।
मेरी निष्ठा नाम का एक भजन। इससे निष्ठा के तीन खण्डों की एक छोटी शृंखला शुरू होती है: यह खण्ड, फिर नित्यानन्द निष्ठा और फिर गौरांग निष्ठा। इनमें प्रार्थना लालसा से हटकर उस स्थिर, खुलकर घोषित निष्ठा की ओर मुड़ती है, जिस पर स्वयं लालसा टिकी है।
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