प्राणेश्वरि! एइ बार करुणा कर मोरे
प्राणेश्वरि! एइ बार करुणा कर मोरे
प्रार्थना (नरोत्तम दास ठाकुर) से।
दो भजन, जिनमें सीधे आध्यात्मिक देह, यानी सिद्ध देह, और श्री वृन्दावन के अपने ऐश्वर्य की साक्षात् प्राप्ति के लिए प्रार्थना है। प्रार्थना में यह उसी आशा का सबसे स्पष्ट कथन है, जो पुस्तक में पहले साधक देहोचित लालसा में संक्षेप में कही गई थी।
2 भजन