आर कि एमन दशा हब
आर कि एमन दशा हब
प्रार्थना (नरोत्तम दास ठाकुर) से।
एक भजन, जिसमें विलाप के साथ वृन्दावन में वास की लालसा जुड़ी है। यह सीधे पिछले खण्ड से आगे चलता है, पर इसका स्वर अभिलाषा से बदलकर खुले शोक का हो जाता है: उस दूरी का शोक, जो भक्त को अब भी उस मनचाहे वास से अलग रखे हुए है।
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