श्री कृष्णाष्टक
श्री कृष्णाष्टक
श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन से।
कृष्ण को अलग-अलग नामों से सम्बोधित छह संस्कृत अष्टक: कृष्णाष्टक, गोविन्दाष्टक, नन्द-नन्दनाष्टक, बिन्दु-माधवाष्टक, हरि-नामाष्टक, और एक कृष्ण-नामावली-स्तोत्र। इनसे गोविन्द से जुड़ी इस पुस्तक की सामग्री उसी औपचारिक संस्कृत अष्टक ढाँचे में पूरी होती है, जिसका प्रयोग विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने पूरी स्तवामृत-लहरी में किया।
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