Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

दान प्रतिग्रह मिथो गुप्त कथा

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टेक्स्ट
हरि हे! दान, प्रतिग्रह, मिथो गुप्त-कथा, भक्षन, भोजन-दान सङ्गेर लक्षन, एइ छय होय, इहाते भक्तिर प्रन
अर्थ

हे हरि! उपहार देना और लेना, गुप्त बातें कहना और सुनना, तथा भोजन देना और ग्रहण करना, यही प्रेमपूर्ण संगति के छह लक्षण हैं। इन्हीं में भक्ति का प्राण निवास करता है।

तत्त्व ना बुझिये, ज्ञाने वा अज्ञाने, असते ए सब कोरि’ भक्ति हाराइनु, संसारी होइनु, सुदूरे रोहिले हरि
अर्थ

इस तत्त्व को न समझकर, जाने-अनजाने अभक्तों के साथ यह सब करते हुए, मैंने भक्ति खो दी और संसारी बन गया। हरि मुझसे बहुत दूर रह गए।

कृष्ण-भक्त-जने, एइ सङ्ग-लक्षने, आदर कोरिबो जबे भक्ति-महा-देवी, आमार हृदोय आसने बोसिबे तबे
अर्थ

जब मैं कृष्ण-भक्तों का इन छह प्रकार की संगति द्वारा आदर करूँगा, तब भक्ति-महादेवी मेरे हृदय के आसन पर बैठेंगी।

योषित्-सङ्गी-जन, कृष्णआभक्त आर, दुँहु-सङ्ग-परिहरि’ तव भक्त-जन- सङ्ग अनुक्षन, कबे वा होइबे हरि!
अर्थ

हे हरि! कब मैं स्त्री-संगियों और अभक्तों दोनों की संगति छोड़कर, निरंतर तेरे भक्तों की संगति करूँगा?