Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

देब देब रमणी उल्लासे

देब देब-रमणी उल्लासे बिबाह-प्रसङ्गे सबे कहे मृदु-भाषे
अर्थ

देवता और देवांगनाएँ आनन्द में भरकर कोमल वचनों से प्रभु गौर के विवाह-समारोह की चर्चा कर रहे हैं।

भाग्यबन्त लोक नदीयार ह-इल बिबाह देखि उल्लास सभार
अर्थ

नदिया के सौभाग्यशाली लोग प्रभु गौर का विवाह-समारोह देखकर आनन्द से भर उठे हैं।

रूपबती कन्या यार घरे से सकल बिप्र मने महा-खेद करे
अर्थ

ब्राह्मण (एकत्र होकर) सुन्दर वधू के घर पहुँचते हैं। उनमें से हर एक मन में बहुत खेद करता है (कि उसकी कन्या प्रभु गौर की वधू नहीं बनने वाली थी)।

एहेन बरेरे कन्या दिते ना पारालि हेन सुख नाहिक भाग्येते
अर्थ

सनातन मिश्र अपनी कन्या का विवाह प्रभु गौर से करते हैं। सनातन को पता नहीं कि वे कैसे इतने भाग्यशाली हुए, कैसे इतने आनन्दित हुए।

ए-इ-मत केह कत कय सकले-इ सनातन मिश्र प्रशंसय
अर्थ

कितने ही अतिथि बोल रहे हैं! सभी सनातन मिश्र की प्रशंसा करते हैं।

सनातन मिश्र भाग्यबान होम-कर्म आदि सब कैल समाधान
अर्थ

भाग्यशाली सनातन मिश्र होम आदि सब विधियाँ करते हैं। सब कुछ पूरा हो जाता है।

कन्या जामाताय निरखिया तिले तिले बाढे सुख उथलये हिया
अर्थ

अपनी कन्या और दामाद को देखकर सनातन मिश्र का हृदय धीरे-धीरे बढ़ते हुए आनन्द से भर उठता है।

कहिते के जाने लोकाचार घन घन नारी-गण दे-इ यजकार
अर्थ

प्रभु गौर के विवाह का वर्णन कौन कर सकता है? एकत्र स्त्रियाँ यजकार की भेंटें अर्पित करती हैं।

बिष्णुप्रिया-देबी गोराचान्दे ल-इते बासर घरे केब थिर बान्धे
अर्थ

विष्णुप्रिया-देवी को साथ लेकर प्रभु गौरचन्द्र विवाह-मण्डप की ओर जाते हैं। कौन शान्त रहता है?

नरहरि पहुं गोर-राय चले बासर घरे कत कौतुक हियाय
अर्थ

आनन्द से भरे हृदय वाले कितने ही अतिथि नरहरि के स्वामी प्रभु गौर राय के पीछे विवाह-मण्डप तक जाते हैं!

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
10