कानु कथा शुनि गदगद भाष
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
कान्हा का समाचार सुनकर, भाव से गद्गद वाणी में, सखी राधा के पास आकर मिलती है।
सखी कहती है, "सुन, हे गौरी, तेरे कारण नन्द का युवा पुत्र अत्यन्त व्याकुल है।"
"तेरे रूप को मन में निहारते हुए वह तेरी जगह एक पेड़ को गले लगा लेता है; तुझे याद करके देखते ही उसकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं।"
"यदि तू उसके पास नहीं गई, हे सुन्दरी, तो प्रेमी कान्हा अपने प्राण ही त्याग देगा।"
वह अब कामदेव की जलती अग्नि को सह नहीं पा रहा। उस आग को शान्त करने के लिए गोविन्द दास उस पर चँवर डुला रहे हैं।