Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री शची अलय अति शोभमय

श्री-शची-अलय अति शोभमय उथलिबे ताहे आनन्द-सिन्धु अधिबास आजि बिलसिब साजि सुखमय गोरा गोकुल-इन्दु
अर्थ

शची का घर अत्यन्त सुन्दर और शोभामय है। शीघ्र ही वह आनन्द के सागर से भर उठेगा। आज अधिवास का उत्सव है। आज आनन्दमय भगवान् गौर, जो स्वयं कृष्ण हैं, गोकुल के चन्द्र कृष्ण, अनेक लीलाएँ करेंगे।

एत कहि चिते नारे स्थिर हैते चाहि चारि-भिते कुलेर बाला उपमा कि मेन घर हैते येन बा-इर हलो चारु चान्देर माला
अर्थ

किसी का हृदय शान्त नहीं है। चारों दिशाओं से किशोरियाँ आ रही हैं। मैं इनकी उपमा किससे दूँ? ये मानो सुन्दर चन्द्रमाओं की एक माला हैं, जो एक साथ चमक रही है।

बिचित्र बसन शोहे आभरण प्रति अङ्गे बेश बिन्यास भाल नाना भङ्गी करि चले सारि सारि नदीयार पथ करि आलो
अर्थ

किशोरियों ने अद्भुत रंग-बिरंगे वस्त्र और सुन्दर चमकते आभूषण पहने हैं। उनके हर अंग में वेश और शृंगार सुन्दर ढंग से सजा है। सुन्दर भाव-भंगिमाओं के साथ वे चलती हैं। किशोरियों की कतार-पर-कतार नदिया की गलियों को प्रकाश से भर रही है।

कत अभिलाषे गिया आ-इ पाशे प्रणमिते कत आदरे आ-इ नरहरि नाथे पाञा आङ्गिनाते जुडा-इल हिया से मुख चा-इ
अर्थ

उनकी कितनी ही अभिलाषाएँ हैं! वे माता शची के पास जाती हैं। वे उन्हें प्रणाम करती हैं और आदर से उनकी पूजा करती हैं। नरहरि के स्वामी अब आँगन में आते हैं। उनका मुख देखकर हर किसी का हृदय शीतल आनन्द से भर जाता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4