Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कृष्नम् अपश्यन् पीत दुकुलम्

टेक
कृष्णम् अपश्यन् पीत-दुकूलम् बिभ्रतम् अर्चिततमम् अर्चिर्-नव-घन-चपला-रुचि-मूलम्
अर्थ

यज्ञ-पत्नियों ने कृष्ण को निहारा। पीले वस्त्र पहने हुए वे वर्षा ऋतु के बादलों और बिजली की शोभा के मूल स्रोत थे।

शिरसि शिखण्डावलिम् उरसि स्रजम् अपि दधतं गिरि-धातुम् इन्द्रधनुर्-युग-मध्य-मधुरतर-सन्ध्यां ध्रुवम् अति-यातुम्
अर्थ

उनके सिर पर मोरपंखों का मुकुट था और वक्ष पर फूलों की माला। गोवर्धन पर्वत के खनिज रंगों से सजे हुए वे सन्ध्या के समय के इन्द्रधनुष से भी अधिक सुन्दर थे।

उदयद्-अरुण-दर-किरणं तम इव विरचित-चिरतर-शोभम् नव-किसलय-दल-वलितं कच-कुलम् अनु कलिताखिल-लोभम्
अर्थ

अन्धकार को प्रकाशित करने वाले सूर्योदय का सुन्दर लाल रंग उनके केशों में सजे फूलों जैसा बनने की लालसा करता है।

भालोपरि-मिलद्-अलक-ततिं श्रुति-कुमुदम् उदञ्चि कपोलम् स्मित-मुखम् उपमित-लक्षण-तारा-युग-धर-शशधर गोलम्
अर्थ

उनके मस्तक पर घुँघराली लटें थीं, कान कमल जैसे थे और गाल उभरे हुए थे। उनका मुस्कुराता मुख दो तारों वाले गोल चन्द्रमा के समान था।

कृत-नट-वेष-विशेष-विलक्षण-लक्षनम् उपचित-रूपम् कर्तुम् इवामृत-वृष्टिम् उदितम् इह कञ्चन जलधर-भूपम्
अर्थ

अत्यन्त सुन्दर और नर्तक नट के वेश में अद्भुत रूप से सजे हुए वे ऐसे लग रहे थे, मानो कोई राजसी मेघ अमृत की वर्षा करने आया हो।

चित्रं तत्र च मित्र-स्कन्धार्पित-बन्धावर-हस्तम् निर्मल-कमल-विधूनन-दक्षिण-दक्षिण-कर-रुचि-शस्तम्
अर्थ

उनकी भुजा एक गोप सखा के कन्धे पर टिकी थी। उनके अद्भुत दाहिने हाथ की शोभा ने निर्मल कमल-पुष्पों को भी फीका कर दिया।

इस भजन के बारे में

पद
6