Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मुदित नयने हिया भुज युग चापि

मुदित नयने हिया भुज-युग चापि शुति रहल हरि कछु न आलापि
अर्थ

आँखें मूँदे, अपनी दोनों मुड़ी भुजाओं से छाती दबाए, हरि वहाँ चुपचाप लेटे रहे, कुछ भी नहीं बोले।

परसङ्गे कहलहि नामहि तोरि तबहि मेलिया आँखि चाहे मुख मोरि
अर्थ

बातों-बातों में जब तुम्हारा नाम लिया गया, तभी उन्होंने आँखें खोलीं और मेरे मुख की ओर देखा।

सुन्दरि इथे नाहि कह आन छान्द ताहे अनुरत भेल श्यामर चान्द
अर्थ

हे सुन्दरी, इस बारे में और कुछ मत कहो, चन्द्रमा-से श्याम अब पूरी तरह केवल तुम्हीं में लीन हो गए हैं।

यो-इ नयन-भङ्गि न सहे अनङ्ग सो-इ नयने स्रबे लोर-तरङ्ग
अर्थ

जिन नेत्रों की चितवन को कामदेव भी सहन नहीं कर सकता, उन्हीं नेत्रों से अब आँसुओं की लहरें बह रही हैं।

यो-इ अधरे सदा मधुरिम हास सो-इ निरास भेल दीर्घ निश्वास
अर्थ

जिन अधरों पर सदा मिठास मुस्कुराती थी, वे अब निस्तेज हो गए हैं, केवल लम्बी आहें भर रहे हैं।

बिद्यापति कह मिछ नह भाति गोबिन्द-दास रहु ताहि कृत साथि
अर्थ

विद्यापति कहते हैं यह कोई मिथ्या नहीं, ऐसा ही सचमुच प्रतीत होता है; गोविन्द दास वहीं रहकर उस दृश्य के साक्षी बने रहते हैं।

इस भजन के बारे में

पद
6