राधे! बल कबे से सुख हैबे
हे राधे! बताइए, वह सुख कब मिलेगा? केलि के अन्त में आप प्राणनाथ को लेकर दोनों जल में उतरेंगे, और आपकी सेवा के लिए हम भी जल में उतरकर सखियों के साथ खेलेंगी।
जितनी सखियाँ होंगी, कृष्ण उतने ही रूप धरकर सखियों के साथ खेलेंगे। उस लीला के अन्त में आप दोनों तट पर आएँगे, और आप रंगीन वस्त्र पहनेंगी।
हम भी तट पर आकर आप दोनों को सजाएँगी, और कितना ही हँसी-मज़ाक होगा। वृन्दा देवी बहुत-से फल-मूल लाकर यमुना के पुलिन पर भोजन कराएँगी।
फिर कुंज-गृह में जाकर आप दोनों दाँव लगाकर पासा खेलेंगे। कृष्ण को हराकर आप उनकी वंशी चुरा लेंगी, और मैं उस लीला में मग्न हो जाऊँगी।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- सेवा लालसा
- भाव
- पद
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