Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधे! बल कबे से सुख हैबे

राधे! बल कबे से सुख हैबे? प्राण-नाथ लञा, रति खेला अन्ते जले दुँहे प्रवेशिबे तोमार सेवार, मोरा पशि जले खेलिबे सखीर सङ्गे
अर्थ

हे राधे! बताइए, वह सुख कब मिलेगा? केलि के अन्त में आप प्राणनाथ को लेकर दोनों जल में उतरेंगे, और आपकी सेवा के लिए हम भी जल में उतरकर सखियों के साथ खेलेंगी।

सखी सङ्ख्या यत, कृष्ण हबे तत खेलिबे सखीर सङ्गे से लीलार अन्ते, दु हे स्थले उठि परिबे वसन रङ्गे
अर्थ

जितनी सखियाँ होंगी, कृष्ण उतने ही रूप धरकर सखियों के साथ खेलेंगे। उस लीला के अन्त में आप दोनों तट पर आएँगे, और आप रंगीन वस्त्र पहनेंगी।

मोरे उठि स्थले, दुँहे साजाइबे परिहास कत हबे वृन्दा-देवी आसि, कत फल-मूले पुलिन भोजन दिबे
अर्थ

हम भी तट पर आकर आप दोनों को सजाएँगी, और कितना ही हँसी-मज़ाक होगा। वृन्दा देवी बहुत-से फल-मूल लाकर यमुना के पुलिन पर भोजन कराएँगी।

कुञ्ज-गृहे गिया, दुजने खेलिबे पाशक करिया पण कृष्णे हाराइया, वंशी करि छुरि लीलाय हबे मगन
अर्थ

फिर कुंज-गृह में जाकर आप दोनों दाँव लगाकर पासा खेलेंगे। कृष्ण को हराकर आप उनकी वंशी चुरा लेंगी, और मैं उस लीला में मग्न हो जाऊँगी।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
सेवा लालसा
पद
4